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छपरा से खुल रही विदेश में रोजगार की राह, पासपोर्ट सेवा केंद्र से युवाओं को मिल रही सुविधा

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सारण में पासपोर्ट सेवा केंद्र। फोटो जागरण



प्रवीण, छपरा। सारण जिले के युवाओं के लिए विदेश रोजगार अब दूर का सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनता जा रहा है। साहेबगंज स्थित मुख्य डाकघर परिसर में संचालित पासपोर्ट सेवा केंद्र ने जिले की तस्वीर बदल दी है।

पहले जहां पासपोर्ट बनवाने के लिए पटना या हाजीपुर जाना अनिवार्य था, वहीं अब छपरा में ही पूरी प्रक्रिया पूरी हो रही है। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है, साथ ही विदेश में रोजगार तलाशने वाले युवाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 तक जिले में 9,500 से अधिक पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। केंद्र पर प्रतिदिन 45 स्लॉट निर्धारित हैं, जिनमें 40 नए पासपोर्ट और 5 नवीकरण या संशोधन के लिए आरक्षित रहते हैं।

औसतन हर महीने 750 से अधिक पासपोर्ट तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि मांग को देखते हुए आने वाले समय में स्लॉट की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
रोजगार की तलाश में बढ़ रहा विदेश रुझान

पासपोर्ट सेवा केंद्र के आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के युवाओं का मुख्य लक्ष्य विदेश में रोजगार प्राप्त करना है। कुवैत, इजरायल और साउथ अफ्रीका सारण के युवाओं के पसंदीदा गंतव्य बने हुए हैं।

इसके अलावा दुबई, कतर और सऊदी अरब में भी बड़ी संख्या में युवा जा रहे हैं।इन देशों में निर्माण कार्य, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, होटल इंडस्ट्री, घरेलू सहायकों और तकनीकी सेवाओं में सारण के लोग कार्यरत हैं।

औसतन 60 हजार से 1.20 लाख रुपये मासिक वेतन मिलने से युवाओं का रुझान और मजबूत हुआ है। कुशल तकनीकी कर्मियों और सुपरवाइजर पदों पर कार्यरत लोगों की आमदनी इससे अधिक बताई जाती है।
भगवान बाजार और गड़खा में सबसे अधिक आवेदन

वर्तमान में भगवान बाजार थाना क्षेत्र और गड़खा थाना क्षेत्र से सबसे अधिक पासपोर्ट आवेदन आ रहे हैं। इसके अलावा छपरा सदर, डोरीगंज, मढ़ौरा और एकमा क्षेत्र भी पीछे नहीं हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों अमनौर, बनियापुर, परसा और जलालपुर में भी जागरूकता तेजी से बढ़ी है।ग्रामीण युवाओं का मानना है कि विदेश जाकर रोजगार करने से परिवार की आर्थिक स्थिति तेजी से सुधर सकती है। कई परिवारों में पहले से कार्यरत प्रवासियों के अनुभव ने अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा

बैंकों के अनुसार, विदेशों में कार्यरत प्रवासियों द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये की रेमिटेंस जिले में भेजी जा रही है। इससे स्थानीय बाजार, निर्माण कार्य, शिक्षा और छोटे व्यवसायों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। शहर और कस्बों में नए मकान निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों में बढ़ोतरी इसका प्रमाण मानी जा रही है।
तकनीकी शिक्षा का बढ़ता महत्व

पासपोर्ट सेवा केंद्र के रिकॉर्ड बताते हैं कि अब ITI, पॉलिटेक्निक, नर्सिंग और अन्य तकनीकी संस्थानों से शिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ी है। कई युवा उच्च शिक्षा के लिए भी विदेश का रुख कर रहे हैं।

केंद्र से जुड़े कर्मी ने बताया कि छपरा में सुविधा शुरू होने के बाद सभी स्लॉट प्रतिदिन भर जा रहे हैं। युवाओं में पासपोर्ट को लेकर जबरदस्त उत्साह है।स्पष्ट है कि पासपोर्ट सेवा केंद्र ने सारण को वैश्विक अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीमित संसाधनों वाला यह इलाका अब विदेश रोजगार के नए नक्शे पर तेजी से उभर रहा है।
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