अब बंदूक नहीं बैंक बैलेंस पर वार; इंटरपोल के सहारे विदेशों में छिपी काली कमाई पर पंजाब पुलिस की नजर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/interpol-1771152546065_m.webpपंजाब में गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तेज।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में गैंगस्टरों के खिलाफ चल रही मुहिम अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस बार पुलिस का निशाना सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि उनकी विदेशों में छिपी काली कमाई है। पंजाब पुलिस इंटरपोल से पहली बार सिल्वर नोटिस जारी करवाने की प्रक्रिया में जुटी है, ताकि विदेशों में मौजूद गैंग्स्टरों की चल-अचल संपत्ति को फ्रीज किया जा सके।
पंजाब पुलिस की यह रणनीति सिर्फ कानून-व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक आर्थिक युद्ध है। अब लड़ाई बंदूक से नहीं, बैंक बैलेंस से लड़ी जाएगी और यही बदलाव गैंग्स्टरों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो सकता है। इंटरपोल का सिल्वर नोटिस एक नया लेकिन बेहद असरदार हथियार माना जा रहा है।
यह नोटिस किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए नहीं, बल्कि उसकी संपत्तियों की पहचान, निगरानी और जब्ती के लिए जारी किया जाता है। इसमें बैंक खाते, लग्जरी वाहन, प्रापर्टी और बिजनेस तक शामिल होते हैं। यानी अपराधी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हो, उसकी कमाई सुरक्षित नहीं रहेगी।
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अब विदेश में कार्रवाई संभव होगी
पंजाब पुलिस के ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन (बीओआई) के वरिष्ठ अधिकारी एलके यादव के मुताबिक, जैसे भारत में मनी लान्ड्रिंग या ड्रग्स से जुड़े मामलों में संपत्ति जब्त की जाती है, वैसे ही अब विदेशों में भी यही कार्रवाई संभव होगी। इसके लिए भारत की ओर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो इंटरपोल से संपर्क कर संबंधित देशों से सहयोग लेगी।
दरअसल, इंटरपोल ने जनवरी 2025 से सिल्वर नोटिस जारी करने की शुरुआत की थी। पहला नोटिस इटली के एक कुख्यात माफिया सरगना की संपत्तियों को जब्त करने के लिए निकाला गया था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 2025 के मध्य तक 50 से ज्यादा ऐसे नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
61 सक्रिय गैंगस्टरों की पहचान हुई
पुलिस के अनुसार, हाल ही में 61 ऐसे सबसे सक्रिय गैंगस्टरों की पहचान की गई है, जो विदेशों से बैठकर पंजाब में रंगदारी, टारगेट किलिंग और आपराधिक नेटवर्क चला रहे हैं। इनमें से 38 के खिलाफ पहले ही प्रत्यर्पण (एक्सट्रडिशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब अगला कदम उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ना है, ताकि अपराध की फंडिंग पर सीधा प्रहार किया जा सके।
पुलिस का मानना है कि विदेशों में बैठे अपराधी अक्सर ड्रग तस्करी, हथियारों की सप्लाई और हवाला नेटवर्क से पैसा कमाकर भारत में हिंसा फैलाते हैं। सिल्वर नोटिस के जरिए यही पैसा जब्त कर लिया गया तो गैंग्स्टरों का नेटवर्क अपने आप कमजोर पड़ जाएगा।
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जानें सिल्वर नोटिस क्या है?
इंटरपोल का नया नोटिस सिस्टम अपराधियों की विदेशों में मौजूद संपत्ति का पता लगाने के लिए इसमें शामिल हो सकते हैं, जैसे- बैंक अकाउंट, मकान, फ्लैट, गाड़ियां, बिजनेस और कंपनियां। गिरफ्तारी नहीं, सीधा फाइनेंशियल अटैक होता है सिल्वर नोटिस।
इससे विदेश बैठे गैंगस्टरों की कमर टूटेगी। हवाला और ड्रग्स के पैसे पर रोक लगाई जा सकेगी। सीबीआई के जरिए इंटरपोल से संपर्क किया जाता है। एक बार संपत्ति फ्रीज हुई तो न पैसा निकाल पाएंगे न नेटवर्क चला पाएंगे। समझें सिल्वर नोटिस व इंटरपोल से जुड़े सवालों के जवाब-
सवाल: अब लड़ाई कैसे बदली ?
जवाब: इससे पहले पहले गैंगस्टर पकड़ो और उन पर केस चलता था। लेकिन अब, गैंगस्टर की दौलत पकड़ो व पूरा सिस्टम ढहा दो। यानी अब गोलियों से नहीं, बैंक बैलेंस से जंग होगी।
सवाल: कितने नोटिस 2025-26 में जारी हुए?
जवाब: पंजाब पुलिस की ओर से 11 रेड नोटिस और 2 ब्लू नोटिस जारी किए गए। पिछले साल आतंकी गतिविधियों में शामिल परमिंदर सिंह उर्फ पिंदी, सुखदेव कुमार उर्फ मनीष बेदी, साजन मसीह उर्फ गोरु को विभिन्न देशों से ट्रैक करवा पकड़ा गया।
सवाल: क्या होता है रेड कार्नर नोटिस?
जवाब: रेड कार्नर नोटिस (आरएनसी) इंटरपोल के जरिए सदस्य देशों के अनुरोध पर जारी एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट है। यह एक गंभीर अपराधी या भगोड़े को खोजने, उसे हिरासत में लेने या प्रत्यर्पण की कार्रवाई होने तक अस्थाई रूप से गिरफ्तार करने के लिए दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से की गई एक अपील है। यह अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है।
इसका उद्देश्य हत्या, बलात्कार, बच्चों के यौन शोषण, या धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों में वांछित अपराधियों को पकड़ना। यह किसी सदस्य देश के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (भारत में सीबीआई) के अनुरोध पर इंटरपोल की ओर से जारी किया जाता है। इसमें इसमें अपराधी की पहचान (नाम, फोटो, उंगलियों के निशान) और अपराध का विवरण होता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित व्यक्तियों को खोजने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।
सवाल: यह कैसे काम करता है?
जवाब: आरएनसी जारी होने के बाद, संबंधित व्यक्ति के बारे में जानकारी इंटरपोल के सभी 195 सदस्य देशों को दी जाती है। यदि वह व्यक्ति किसी अन्य देश में पाया जाता है, तो उसे वहां की पुलिस गिरफ्तार कर सकती है या उसके प्रत्यर्पण (स्वदेश वापसी) के लिए कार्रवाई शुरू कर सकती है।
ब्लू कार्नर नोटिस (बीसीएन): इंटरपोल की ओर से जारी एक अंतरराष्ट्रीय चेतावनी है, जिसका उद्देश्य किसी आपराधिक जांच के सिलसिले में संदिग्ध व्यक्ति की पहचान, स्थान या गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र करना है। यह गिरफ्तारी का वारंट नहीं है, बल्कि एक जांच नोटिस है, जो सदस्य देशों की पुलिस को संदिग्ध व्यक्ति का पता लगाने में मदद करता है।
इसका उद्देश्य विदेश भागे संदिग्धों की पहचान करना, लोकेशन लगाना, आपराधिक रिकार्ड की पुष्टि करना या किसी अपराध से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी हासिल करना। इसे आमतौर पर तब जारी किया जाता है जब कोई अपराधी गिरफ्तारी से बचने के लिए दूसरे देश में भाग जाता है या जांच के लिए महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता होती है।
इसे इंटरपोल सदस्य देशों (जैसे भारत में सीबीआई) के अनुरोध पर जारी किया जाता है। इसमें आरएनसी नोटिस में सीधे गिरफ्तारी की मांग होती है, जबकि बीसीएन में केवल जानकारी एकत्र की जाती है।
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