काली माता मंदिर की पौराणिकता का खुलेगा रहस्य, खोदाई से निकली प्राचीन आकृतियां की जांच से होगा संभव
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/kalka9-1771140863431_m.webpशक्तिपीठ काली माता मंदिर के निर्माण कार्य के लिए की जा रही खोदाई करते समय निकली त्रिनेत्र भगवान शिव और माता पार्वती की छवि वाली आकृति।
राजकुमार, कालका। शक्तिपीठ काली माता मंदिर की पौराणिकता का रहस्य खुल सकता है। यह संभव होगा मंदिर के निर्माण कार्य के लिए की जा रही खोदाई के समय निकली प्राचीन आकृतियां की जांच से। लोगों ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से प्राचीन आकृतियों की जांच की मांग की है।
मंदिर के नवनिर्माण के तहत किए जा रहे खोदाई कार्य के दौरान प्राचीन आकृतियां मिलने से क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। मंदिर के पूर्व महंत एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर दर्शन गिरी महाराज ने धूणे के अंदर प्राचीन मंदिर होने की बात कही है। लोगों की मांग पर धूणे के पास जेसीबी से खोदाई का कार्य रोक दिया गया है और दोबारा शुरू होने पर यहां मैनुअल खोदाई करवाई जाएगी।
खोदाई का कार्य मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन धूणे के नीचे किया जा रहा था। इसी स्थान से पत्थर का बना सुदर्शन चक्र सहित अन्य आकृतियां मिली। बड़े पत्थर से बना भव्य सुदर्शन चक्र निकलने के बाद अब एक पत्थर पर गोलाकार आकृति में त्रिनेत्र भगवान शिव और माता पार्वती की छवि भी प्राप्त हुई है। वीरवार को भी एक बड़ी मूर्ति निकली थी।
पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी मंदिर पहुंचे और प्रारंभिक जांच मूर्तियां 11वीं सदी की बताया। हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही इनकी वास्तविक प्राचीनता स्पष्ट हो सकेगी।
महामंडलेश्वर दर्शन गिरी महाराज ने कहा कि खोदाई के दौरान मिल रही सदियों पुरानी आकृतियां इस स्थान पर प्राचीन मंदिर होने की ओर संकेत करती हैं। उनका मानना है कि यह स्थान युगों-युगों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है।
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