जमशेदपुर में गोविंदपुर-बारीगोड़ा रेलवे ओवरब्रिज के नए डिजाइन मंजूर, अब टूटने से बच जाएंगे 63 घर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/15/article/image/_Railway-overbridge--1771138042360_m.webpजागरण संवाददाता, जमशेदपुर। गोविंदपुर में प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज \“टी\“ आकार में बनेगा, जबकि बारीगोड़ा का ओवरब्रिज \“थ्रू\“ टाइप का होगा, जिसमें गाड़ियां एक ओर से चढ़ेगी और दूसरी ओर उतर जाएगी।
चक्रधरपुर मंडल ने गोविंदपुर व बारीगोड़ा में प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज का डिजाइन तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था, जिसे स्वीकृत कर लिया गया है। 23 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन ही दोनों ओवरब्रिज का उद्घाटन किया था।
इसमें गोविंदपुर (फाटक संख्या 137) ओवरब्रिज के लिए 70 करोड़ और बारीगोड़ा (फाटक संख्या 138) के लिए 68 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन लगभग दो वर्ष का विलंब होने के कारण इसके बजट को फिर से रिवाइज किया जाएगा।
हालांकि पूर्व में प्रस्तावित दोनों ओवरब्रिज के नक्शे में परिवर्तन किया गया है ताकि कम से कम अतिक्रमण को हटाने की आवश्यकता पड़े।
मालूम हो कि पूर्व में यह परियोजना केंद्र व झारखंड सरकार द्वारा 50-50 प्रतिशत साझा लागत पर पूरा होना था लेकिन लगातार हो रही देरी के कारण सांसद बिद्युत बरण महतो की पहल पर अब रेलवे दोनों परियोजना का पूरा खर्च स्वयं वहन करेगी।
93 के बजाए टूटेंगे 30 घर
इस परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन अतिक्रमण है। रेलवे की जमीन पर भी अतिक्रमण कर कई घर व दुकानें बन चुकी है। पूर्व में जो नक्शा तैयार किया गया था उसके तहत सिर्फ गोविंदपुर में 93 घर-दुकानें तोड़े जाने का प्रस्ताव था, जिस पर ग्राम सभा ने अपनी सहमति भी दे दी थी, लेकिन अब नए नक्शे के तहत अब सिर्फ 30 घर ही टूटेंगे।
इसके अलावा गोविंदपुर में अन्ना चौक से लुआबासा होकर बाइपास सड़क का भी प्रस्ताव है। यह परियोजना आसनबनी-टाटानगर सेक्शन पर भारी ट्रैफिक और हादसों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
18 फरवरी को गार्डेनरीच मुख्यालय में होगी बैठक
गोविंदपुर व बारीगोड़ा में प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज में आई नई प्रगति पर 18 फरवरी को एक बैठक आयोजित की गई है। इसमें दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा, चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया के अलावा सांसद बिद्युत बरण महतो भी शामिल होंगे।
इस बैठक में ही यह तय होगा कि प्रस्तावित दोनों परियोजना में रेलवे की जमीन के अलावा कितनी रैयती व झारखंड सरकार की जमीनों के अधिग्रहण की जरूरत पड़ेगी।
डबल रेललाइन में यदि ओवरब्रिज बन जाए तो सभी राहगीरों की परेशानी कम होगी। 18 फरवरी को इसे लेकर बैठक है जिसमें देखेंगे कि रेलवे जमीन के अलावा कितनी रैयती या राज्य सरकार की जमीन है। -बिद्युत बरण महतो, सांसद, पूर्वी सिंहभूम
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