Chikheang Publish time 4 hour(s) ago

नन्हे कंधों पर भारी कांवड़, पर मन में एक ही जिद्द: घर की खुशहाली के लिए हरिद्वार से जल लेकर लौटा ये छोटा श‍िवभक्‍त

https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/72889844-1771090311431_m.webp

हरिद्वार से फुफेरा भाई रितिक का हाथ पकड़कर कांवड़ लेकर आता दस वर्षीय शिवशांत।जागरण



गौरव शुक्ला, मुरादाबाद। नन्हे कंधों पर कांवड़ और मन में घर की खुशहाली की कामना लिए गगन वाली मैनाठेर के 10 वर्षीय सुशांत की आस्था शनिवार को लोगों के लिए प्रेरणा बन गई। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहा यह बालक थकान से बेपरवाह दिखा। उसके कदमों की रफ्तार में मासूमियत थी, लेकिन संकल्प बड़ा था। सुशांत ने बताया कि वह भगवान शिव से अपने घर के क्लेश दूर करने और माता-पिता के बीच चल रहे मनमुटाव को खत्म करने की प्रार्थना कर रहा है।

मां अक्सर कहतीं हैं, तुम चिंता न करो सब भोले ठीक करेंगे। इसी बात को लेकर कांवड़ लाने की मन में ठानी। छोटी सी उम्र में इतनी लंबी कांवड़ यात्रा पूरा कर पाना आसान नहीं है। पैरों में भले ही छाले पड़ गए, लेकिन परिवार में सुख-शांति की चाह ने उसके हौसले को मजबूत कर दिया।

रास्ते भर श्रद्धालु जब उसके कंधे पर सजी कांवड़ और चेहरे पर झलकते विश्वास को देख रहे थे, तो उसके लिए दुआ करने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे। सुशांत इस यात्रा में अकेला नहीं है। उसके साथ फुफेरा भाई रितिक भी कदम से कदम मिला रहा था। वहीं, मामा सत्यभान भी हर पल उसका संबल बने हुए हैं। हर पड़ाव पर दोनों बच्चे बम-बम भोले का जयघोष करते हुए आगे की राह तय करने में लगे हुए थे।
भक्ति की डगर पर श्रद्धा डगमगाई तो एक-दूजे का साथ बना सहारा

शनिवार को कांठ रोड पर भक्ति की कठिन डगर पर जब श्रद्धा डगमगाई तो प्रेम सहारा बन गया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे भोजपुर के दंपती ममता और रामकिशोर दोनों ने भगवान भोलेनाथ से एक ही कामना की है कि जीवन भर एक-दूसरे का साथ बना रहे। रास्ते में अर्धांगिनी ममता जब अत्यधिक थकान से निढाल होने लगीं, तो पति रामकिशोर ने केवल भार ही नहीं, बल्कि उनका हाथ थाम कर हौसला भी बढ़ाया। सड़क किनारे यह दृश्य देख इधर से गुजरने वाले राहगीर ठहर गए।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/14/template/image/72889976-1771090434256.jpg

रामकिशोर ने बताया कि उन्होंने भोलेनाथ से परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में सदैव प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना की है। दंपती का यह दृश्य लोगों के लिए संदेश छोड़ गया कि जीवन की कठिन राह में यदि साथी का साथ मजबूती से बना रहे, तो हर थकान आसान हो जाती है। कांवड़ यात्रा यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि दांपत्य विश्वास की एक मार्मिक मिसाल बन गई। जहां पति का साथ ही पत्नी के लिए सबसे बड़ी ऊर्जा साबित हुआ।
कांवड़ और वैलेंटाइन बना आस्था-प्रेम का अनोखा संगम

सड़क पर कंधों पर सजी कांवड़, हाथों में श्रद्धा और बीच में लाल दिल पर लिखा संदेश हैप्पी वैलेंटाइन। भक्ति और प्रेम का ऐसा अनोखा संगम राहगीरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं ने इस बार अपनी आस्था को अलग अंदाज में सजाया। कांवड़ में फूलों और झालरों के साथ लाल दिल का प्रतीक लगाया गया, जिस पर वैलेंटाइन का संदेश अंकित था।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/14/template/image/72888727-1771090471401.jpg

यह भगवान शिव को समर्पित था। चौरासी घंटा के श्रद्धालु आशीष, अमन, आर्यन, अमरीश का कहना है कि सच्चा प्रेम केवल एक दिन का नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ व विश्वास है और वही प्रेम वे चौरासी घंटा मंदिर पर भगवान भोलेनाथ के चरणों में अर्पित करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 60 सालों से बेड़ा ला रहे हैं।

यह भी पढ़ें- शिव भक्ति में डूबा मुरादाबाद, महाशिवरात्रि के लिए हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त; हर ओर भाेले की जयकार
Pages: [1]
View full version: नन्हे कंधों पर भारी कांवड़, पर मन में एक ही जिद्द: घर की खुशहाली के लिए हरिद्वार से जल लेकर लौटा ये छोटा श‍िवभक्‍त