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हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: RDG बंद होने से प्रदेश की राजनीति में हलचल, वित्तीय संकट के बीच ये 5 मुद्दे उठेंगे

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव



राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। 16 फरवरी से आरंभ हो रहा विधानसभा का बजट सत्र सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकता है। एक ओर उसे वित्तीय चुनौतियों के बीच संतुलन साधना है, तो दूसरी ओर विपक्ष को भी जवाब देना होगा। पहले चरण में विधानसभा का सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 18 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद सत्र के दूसरे चरण में बजट पेश होगा।

यह सत्र केवल बजट पेश करने की औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की वित्तीय दिशा और राजनीतिक धार दोनों तय करेगा।
टिकी रहेंगी प्रदेश की निगाहें

सदन के भीतर बहस कितनी रचनात्मक रहती है, इस पर प्रदेश की निगाहें टिकी रहेंगी। आरडीजी के मामले में सत्ता व विपक्ष के बीच में अभूतपूर्व टकराव की स्थिति देखने को मिलेगी। यह मुद्दा मुख्य केंद्र बिंदु रहेगा।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में सदन के भीतर राजनीतिक पारा चढ़ना तय है।
चल रहा आरोप प्रत्यारोप का दौर

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और सरकार जहां इसे प्रदेश के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगा रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार केंद्र को दोष देकर अपनी नाकामी छिपा रही है। इसके अतिरिक्त केंद्र से प्राप्त और लंबित केंद्रीय सहायता पर भी पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की संभावना है।
इन मुद्दों की भी गूंज

[*]भाजपा बंद पड़ी विधायक व ऐच्छिक निधि को लेकर सरकार को घेर सकती है।
[*]स्थानीय निकाय चुनाव में देरी।
[*]प्रदेश में बढ़ते चिट्टे के जाल।
[*]हिमाचल पथ परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति भी चर्चा के केंद्र में रहेगी।
[*]देहरा में मिड-डे मील महिला कार्यकर्ता की हत्या का मामला भी सदन में गूंज सकता है।

राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होगी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, सत्र की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से उत्पन्न परिस्थितियों पर केंद्रित रह सकता है। सरकार का दावा है कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। विशेष श्रेणी का पहाड़ी राज्य होने के कारण केंद्रीय सहायता पर निर्भरता अधिक है। ऐसे में इस निर्णय का सीधा असर विकास योजनाओं और वित्तीय संतुलन पर पड़ रहा है।
सर्वदलीय बैठक में भी उठेगा आरडीजी मुद्दा

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र संचालन को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। वहां भी आरडीजी का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। सदन की कार्यवाही सुचारू रहे, इसके प्रयासों के बीच यह विषय तल्ख बहस का कारण बन सकता है।
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