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अब मम्मी-पापा नहीं डांटेंगे! बोर्ड एग्जाम की तैयारी में ऐसे करें AI का इस्तेमाल, PM मोदी ने दी खास सलाह

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PM मोदी ने बताया बोर्ड परीक्षा में AI का स्मार्ट उपयोग: छात्रों के लिए खास सलाह (Picture Credit- AI Generated)



आरती तिवारी, नई दिल्ली। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के बीच शुभम अपने लैपटाप को भी पढ़ाई का जरिया बना रहा है। पहले मम्मी-पापा के डर से वह अपने डाउट्स क्लियर करने के लिए इंटरनेट की मदद नहीं ले पा रहा था, मगर नौ फरवरी, 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चाके नौंवें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसकी परेशानी हल की।

उन्होंने विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक बहुत ही आधुनिक और महत्वपूर्ण विषय पर बातचीत की- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शिक्षा में उपयोग। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार केवल ‘परीक्षा के तनाव’ पर बात नहीं की, बल्कि ‘भविष्य की शिक्षा’ पर ध्यान केंद्रित किया।प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीक से डरने के बजाय उसे अपनाना और अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए उसका उपयोग करना आज के समय की मांग है।
बनाएं इसे अपना मार्गदर्शक

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्यवर्धन) उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने चेतावनी दी कि मोबाइल और एआई को अपना ‘मालिक’ न बनने दें। तकनीक का उपयोग अपनी कुशलता निखारने के लिए करें, न कि उस पर पूरी तरह निर्भर होने के लिए। यहां मुख्य जोर ‘मानसिक दृष्टिकोण’ पर है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है। यह आपकी ‘मेहनत’ को कम नहीं करता, बल्कि उसे ‘स्मार्ट’ बनाता है। जैसे कैलकुलेटर ने गणित नहीं खत्म किया, वैसे ही एआई शिक्षा को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उसे विस्तार देगा। मगर यह भी स्पष्ट रहे कि यदि छात्र अपनी सोचने की क्षमता एआई को सौंप देंगे, तो उनकी मौलिकता खत्म हो जाएगी।
अब कैसी झिझक

छात्र एआई का उपयोग जटिल विषयों को समझने, कठिन अवधारणाओं को स्पष्ट करने और अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए एक निजी ट्यूटर की तरह कर सकते हैं। एआई एक ऐसे ट्यूटर की तरह है जो 24/7 उपलब्ध है। अगर रात को दो बजे भी आपको कोई गणित का सूत्र समझ नहीं आ रहा, तो एआई उसे समझाने के लिए तैयार है। अक्सर छात्र क्लास में सवाल पूछने से कतराते हैं।

एआई उन्हें बिना किसी झिझक के बार-बार पूछने की स्वतंत्रता देता है। हर छात्र की सीखने की क्षमता अलग होती है। एआई यह पहचान लेता है कि आप कहां कमजोर हैं और उसी हिसाब से आपको अभ्यास करवाता है। इंटरनेट पर सूचनाओं का अंबार है। एआई एक ‘फिल्टर’ की तरह काम करता है और आपको केवल वही सामग्री देता है जो आपकी परीक्षा के लिए जरूरी है।
विकल्प नहीं यह कोई

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान यह भी कहा कि एआई सीखने की प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। यह आपकी मेहनत और मौलिक सोच को सहारा दे सकता है, लेकिन आपकी जगह नहीं ले सकता। तकनीक कभी भी ‘गुरु’ (शिक्षक) का स्थान नहीं ले सकती। शिक्षकों को अब केवल जानकारी देने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शकबनना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने सुझाव दिया कि छात्र बुनियादी जानकारी एआई से लेकर आएं और स्कूल में उस पर गहन चर्चा करें। इससे पढ़ाई बोरिंग नहीं रहेगी और छात्रों में ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ विकसित होगी!
ऐसे करें एआई का स्मार्ट उपयोग

छात्र अपनी पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग इन तरीकों से कर सकते हैं:

[*]डाउट क्लियरिंग: कठिन सवालों के तुरंत जवाब और स्पष्टीकरण पाना।
[*]स्टडी प्लान: अपने सीखने की गति के अनुसार व्यक्तिगत समय सारणी बनाना।
[*]संसाधन खोजना: विषय से संबंधित बेहतरीन किताबें, वीडियो और लेखों की क्यूरेटेड लिस्ट प्राप्त करना।
[*]अभ्यास प्रश्न: पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर एआई से नए अभ्यास प्रश्न तैयार करवाना।


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