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उत्तराखंड भाजपा 23 मार्च को करेगी चुनावी शंखनाद, पेश करेगी चार साल का रिपोर्ट कार्ड

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भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में उपस्थित केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व अन्य सदस्य।



अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी ने कई घंटों का मंथन कर सत्ता में वापसी का रूट प्लान तैयार किया। भाजपाई दिग्गजों ने यह तय किया कि प्रदेश सरकार अपने चार वर्ष पूरे होने पर 23 मार्च को विशाल शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी शंखनाद करेगी।

डेढ़ से दो लाख भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के लक्ष्य के साथ यह रैली न केवल संगठन की ताकत दिखाएगी, बल्कि विपक्ष को सीधी चुनौती भी देगी। इसके लिए प्रधानमंत्री या गृहमंत्री की मौजूदगी सुनिश्चित करने की कोशिश है, ताकि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय का बड़ा संदेश भी दिया जा सके।

चुनावी शंखनाद में धामी सरकार जिन मुद्दों को अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश करेगी, उनमें सख्त नकल-विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल, भू-कानून में संशोधन, धार्मिक अतिक्रमण पर कार्रवाई, निवेश समिट के जरिए औद्योगिक पूंजी आकर्षित करना, चारधाम यात्रा और बुनियादी ढांचे का विस्तार, महिला सशक्तिकरण योजनाएं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शामिल रहेंगी।

पार्टी का फोकस निर्णायक नेतृत्व, सख्त प्रशासन व विकास को केंद्र में रखकर वर्ष 2027 की सियासी लड़ाई पर रहेगा। इसके साथ ही भाजपा उन बूथों पर इस बार सर्वाधिक फोकस करने के मूड में है, जहां पिछली बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
डेमोग्राफी चेंज और धौलास रहेगा सियासी केंद्र

चुनावी रैली में सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी प्रखर हिंदुत्व की छवि को और धार देने की भी कोशिश करेंगे।

चुनावी शंखनाद में डेमोग्राफी चेंज का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाने पर सहमति बनी। पार्टी इसे भू-कानून में सख्ती, अवैध बस्तियों पर कार्रवाई, धार्मिक अतिक्रमण हटाने और समान नागरिक संहिता की पहल से जोड़ने का प्रयास करेगी, वहीं धौलास भूमि प्रकरण को भी राजनीतिक रूप से प्रमुख स्थान दिया जाएगा।

धौलास में कृषि भूमि की बिक्री के मुद्दे को भाजपा कानून व्यवस्था, पारदर्शिता और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने का प्लान बना रही है।

भाजपा का प्रयास है कि विकास कार्यों इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पहचान और सुरक्षा के मुद्दों को समानांतर रखकर चुनावी बहस को नए मोड़ पर ले जाया जाए।

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