एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग बढ़ा रहा जानलेवा रेसिस्टेंस, डॉ. अवधेश कुमार की चेतावनी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/Dr.-Awadhesh-Kumar-1771082467524_m.webpदैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते डा.अवधेश कुमार। जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। सामान्य खांसी, बुखार और जुकाम में एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग से एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा वे लोग आ रहे हैं, जो बिना डाक्टर की सलाह के गूगल पर सर्च कर बीमारियों में दवा का सेवन कर रहे हैं। इसके साथ ही एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा का अधूरा कोर्स भी रेसिस्टेंस का कारण बन रहा है। यह खतरा सांस के रोगी और खासतौर पर टीबी के रोगियों में सबसे ज्यादा मिलता है। इसका समय पर इलाज नहीं होने से यह स्थिति जानलेवा बन रही है।
दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के रेस्पिरेटरी विभागाध्यक्ष प्रो. अवधेश कुमार ने एंटीबायोटिक्स के लाभ और मनमाने तरीके से दवा खाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। दैनिक जागरण के समाचारीय अभियान को समाज में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) की जागरूकता के लिए उपयोगी बताते बताया। पेश है पाठकों के बातचीत के मुख्य अंश...
[*]सर्दी, जुकाम और खांसी में एंटीबायोटिक्स का सेवन करना चाहिए या नहीं? - वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही। राजेश कुमार त्रिपाठी, मकड़ीखेड़ा।
[*]वायरल मामलों में एंटीबायोटिक्स का प्रयोग ठीक नहीं। डाक्टर की सलाह पर बैक्टीरिया से जुड़ी समस्या पर ही सात से 14 दिन की एंटीबायोटिक्स दवा का सेवन करना चाहिए। बिना डाक्टर की सलाह के ली गई दवा ही एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस का कारण बनती है। इसलिए डाक्टर की सलाह पर ही दवा का सेवन करें। दवा का डोज डाक्टर उम्र और वजन के हिसाब से निर्धारित करता है।
[*]पैदल चलने में सांस फूल रही है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में क्या इलाज करना चाहिए? - प्रदीप दिवाकर, बिठूर।
[*]मौसम में बदलाव के कारण फ्लू और सामान्य खांसी, बुखार और जुकाम हो सकता है। घर में तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर प्रयोग करें। बिना डाक्टर की सलाह के दवा नहीं लें और दवा का कोर्स जितने दिन का डाक्टर ने लिखा है। उसे पूरा करें।
[*]अस्थमा की मरीज हूं, एंटीबायोटिक दवा लेने से नुकसान हो सकता है? - ममता गुप्ता, किदवई नगर। आंचल कुमार तिवारी, शास्त्री नगर।
[*]अस्थमा के मरीज को एंटीबायोटिक्स नहीं लेनी चाहिए। जब आपको बलगम और खांसी आने की समस्या हो तब आप एंटीबायोटिक्स दवा का प्रयोग डाक्टर की सलाह पर करें। जब आपकी समस्या बढ़ जाती है, तब आपको डाक्टर की सलाह पर ही एंटीबायोटिक्स का सेवन ही करना चाहिए।
[*]एंटीबायोटिक्स दवा के दुरुपयोग से कैसे बचाव करें? - जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक। आरपी शरद, बर्रा छह।
[*]बिना कारण एंटीबायोटिक्स दवा नहीं लेनी चाहिए। डाक्टर की सलाह पर लक्षण के आधार पर दवा खाएं। डाक्टर ने जितनी डोज और जितने दिन का कोर्स लिखा है। उसे जरूर पूरा करें। अधूरी दवा और डोज में बदलाव भी एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) का कारण बनता है। एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा खाने में मनमानी के कारण ही रेसिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।
[*]पैदल चलने पर सांस फूलती है और सीने में दर्द रहता है। क्या करें? - उमा शुक्ला, रूमा।
[*]आपके लक्षण से पता चल रहा है कि यह दिल की समस्या है। एक बार आप हृदय रोग संस्थान में अपनी जांच करा लें। यहां पर दिल की बीमारी के कई विशेषज्ञ हैं। जो आपकी समस्या की जांच कर उपचार करेंगे।
[*]टीबी रोग की बीमारी से कैसे बचाव करें? - माया रावत, नानकारी।
[*]अगर आपके घर में टीबी रोग का कोई मरीज है। तो खांसते, छींकते समय उससे दूरी रखें। संभव हो उसे मास्क लगाकर ही घर में रखें। ऐसा करने से घर के अन्य सदस्य भी बीमारियों से बचे रहेंगे। संक्रमण का खतरा अन्य किसी सदस्य को नहीं होगा।
[*]65 वर्ष का हूं, काम करने पर हांफनी की समस्या होने लगती है। क्या करें? - प्रेमचंद्र श्रीवास्तव, शिवराजपुर।
[*]एक बार आप मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में दिखा लें। फेफड़ों की जांच करने के बाद ही आपकी समस्या का निदान किया जा सकता है। तब तक हरी सब्जियां और फल का सेवन करें। ऐसा करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी और आप बीमारियों से बचे रहेंगे।
[*]एंटीबायोटिक्स क्या है। इसके बारे में बताएं? - तुलसी राम, यशोदा नगर।
[*]जब आपके शरीर में बैक्टीरिया संक्रमण का हमला होता है। तब एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा सात से 14 दिन तक चलाता है। इससे बैक्टीरिया समाप्त हो जाता है। सामान्य खांसी, बुखार और जुकाम में एंटीबायोटिक्स का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जब डाक्टर लिखे तब ही एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा लें।
[*]पिछले एक वर्ष से रात में सोते समय सांस का रुक जाती है और खर्राटे आते हैं? राकेश शुक्ला, श्याम नगर।
[*]अधिक वजन होने के कारण इस प्रकार की समस्या होती है। रात में सोते समय सांस का रुकना एप्निया का लक्षण है। एक बार आप मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में आकर दिखा लें। स्लीप स्टडी के बाद आपकी समस्या का निदान होगा।
[*]पेट खराब रहता था, एंटीबायोटिक्स खाई है, अब दिक्कत ज्यादा बढ़ गई है? - आरबी सैनी, विनायकपुर।
[*]एंटीबायोटिक्स ग्रुप की कोई भी दवा जांच के बाद ही निर्धारित समय तक खानी चाहिए। एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा की सही डोज शरीर के फायदेमंद है। अधिक एंटीबायोटिक्स के सेवन से गट हेल्थ प्रभावित होती है। इस कारण ही शरीर में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
[*]78 वर्ष का हूं, सांस फूलती है। डाक्टर एंटीबायोटिक्स दवा लिख देते हैं? - अशोक कुमार सिंह, जूही कलां।
[*]सांस फूलना और दिल की बीमारी में एंटीबायोटिक्स दवा की जरूरत नहीं पड़ती है। लंबे समय से आपको इस प्रकार की समस्या है तो एक बार आप मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में दिखा लें। जहां पर फेफड़ों की जांच करके आपको उपचारित किया जाएगा।
इन बातों का रखें ध्यान
[*]झोलाझाप को दिखाकर दवा लेने से बचें।
[*]बीमारियों में डाक्टर की सलाह पर ही दवा लें।
[*]तीन से सात दिन की दवा का कोर्स करें।
[*]अंडर डोज के कारण टीबी के मरीजों की गंभीरता बढ़ रही है।
[*]ओवर डोज दवा लेने से बचें।
[*]गूगल पर देखकर आन द काउंटर दवा लेने से बचें।
[*]हर बीमारी में एंटीबायोटिक्स ग्रुप की दवा लेने से बचें।
[*]पर्याप्त नींद लें और खान-पान को बेहतर करें।
[*]एंटीबायोटिक्स की अधिक डोज गट हेल्थ को प्रभावित करती है।
इन्होंने किए प्रश्न
राधेश्याम, कानपुर देहात। पूजा अग्निहोत्री, दादानगर। श्याम द्विवेदी, लालबंगला। केशव शरण सिंह, बिल्हौर। रामचंद्र शुक्ला, फतेहपुर। सतीश गुप्ता, जरौली। आकांक्षा कुशवाहा कल्याणपुर। सीता देवी नानकारी। अश्वनी दीक्षित काकादेव। उमा नारायण मिश्रा, रावतपुर। ज्ञानेंद्र गुप्ता, परमपुरवा।
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