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नोएडा में बिल्डरों के पास फंसा 300 करोड़ का IFMS फंड, हैंडओवर के बाद नहीं दी रकम; 35,000 परिवार परेशान

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इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी लेकर परेशान एओए। फोटो: सांकेतिक



प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में सुविधाओं का अभाव है। 50 बिल्डरों के बैंक खातों में 35 हजार परिवारों के 300 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फंसी है। यह रकम आईएफएमएस (इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी) फंड के रूप में हैं।

बिल्डरों ने एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) को हैंडओवर के बाद भी यह फंंड हस्तांतरित नहीं किया है। यह विवाद अब न्यायालय में विचाराधीन हैं या प्राधिकरण में लंबित हैं। सोसायटियों में बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव है। सुविधाओं के अभाव के बीच भी बिल्डर ने आईएफएमएस फंड एओए के खाते में हस्तांतरित नहीं किया है।

बता दें असुविधाओं से जुझती सोसायटियों की बुनियाद तक कमजोर हो रही है। जगह-जगह से प्लास्टर गिर रहा है। सोसायटी में संचालित डीजल जनरेटर फंड के अभाव में गैस से संचालित नहीं हो पा रहे हैं।

बडे रखरखाव कार्य लिफ्ट और एस्केलेटर की मरम्मत और मेंटेनेंस रुक गया है। सुरक्षा उपकरण बढ़ नहीं पा रहे हैं। आंतरिक पाइपलाइन और फायर फाइटिंग लाइन जर्जर होने से गंभीर समस्याएं बढ़ रहीं हैं।
प्राधिकरण से नहीं निकल रहा हल

आईएफएमएस फंड को एओए के खाते में हस्तांतरित करने के लिए प्राधिकरण ने कई बिल्डरों को नोटिस जारी किए। नोटिस के बाद भी यह मामला नहीं हल हो सका। उसके बाद कई मामले न्यायालय में पहुंचे।
कटौती के साथ हस्तांतरित का मिल रहा प्रस्ताव

बिल्डरों की ओर से आइएफएमएस फंड में कटौती बाद हस्तांतरित करने का कई एओए को प्रस्ताव दिया गया। इस पर एओए तैयार नहीं हैं। बिल्डर की ओर से यह रकम बकाए मेंटेनेंस रूप में काटने की बात कही जा रही हैं।
फंड के अभाव में यह कार्य रुके

[*]पानी की आपूर्ति और ट्रीटमेंट प्लांट की खराबी से गंदे पानी की आपूर्ति बढ़ी।
[*]बिजली बैकअप जेनरेटर की सर्विसिंग और गैस में नहीं हुआ बदलाव।
[*]गार्डन और लैंडस्केपिंग कार्य रुके, रखरखाव के अभाव में हरियाली सूखा रही।
[*]स्विमिंग पूल और जिम की मेंटेनेंस प्रभावित।
[*]क्लब हाउस और कम्युनिटी हाल की रिपेयर नहीं।
[*]रोड, पार्किंग और ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत रुकी, एक्सपेंंशन ज्वाइंट का कार्य अधूरा।



बिल्डर पर 2.25 करोड़ रुपये का आईएफएमएस बकाया है। फंड नहीं होने से एक्सपेंशन ज्वाइंट और बालकनी की मरम्मत कार्य रुका हुआ है। इसमें मोटा खर्च होता है। बिल्डर के खिलाफ लडाई जारी है।

- नितेश रंजन, एओए अध्यक्ष, प्रतीक विस्टीरिया

नौ करोड का आईएफएमएस बकाया है। डीजी सेट का गैस में बदलाव, पानी और फायर की पुरानी लाइन बदलने में मोटे खर्च की जरूरत है। आइएफएमएस होता तो यह कार्य बिना देरी के हो जाते।

- वाईपी गुप्ता, एओए अध्यक्ष महागुन मॉडर्न

4.5 करोड का आईएफएमएस बकाया है। आठ वर्ष होने को जा रहे हैं। रजिस्ट्री नहीं हुईं हैं। एनबीआरसी में केस लड़ रहे हैं। सामान्य मेंटनेंस भी इस समय चुनौतियों भरा है। फंड होने पर रजिस्ट्र्री और एक्सपेंशन ज्वाइंट का कार्य सबसे पहले कराते।

- सौमित्रा वासू, एओए अध्यक्ष स्काईटेक मैट्रोट

चार करोड का फंड बकाया है। बेसमेंट का कार्य पूरा नहीं है। फंड का अभाव है। सोसायटी में पार्किंग बनाकर मेंटनेंस से संबंधित सभी लंबित कार्यों को बिना देरी के पूरा कराया जाता। प्राधिकरण स्तर से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

- प्रवल सोदानी, एओए सदस्य, गोल्फ सिटी प्लाट-11


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