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लंबित जमानत अर्जियों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा-यह कैदियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। विभिन्न अदालतों में जमानत की अर्जी के लंबे समय तक लंबित रहने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय से लंबित अर्जी गंभीर चिंता का विषय है और इससे कैदियों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन होता है।

न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि सत्र अदालत के साथ ही हाई कोर्ट में भी जमानत अर्जी इतने लंबे समय तक लंबित रहीं। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़ी अर्जी 20 दिसंबर 2024 से लंबित थी और पहली बार इस अदालत सामने आई है।

अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए पीठ ने कहा कि जमानत अर्जियों के लंबे समय तक लंबित रहने से जेलों में बंद आरोपितों को ट्रामा होता है और यह मौलिख अधिकारों का उल्लंघन है।

अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व में भी कई फैसलों में बार-बार यह देखा गया है कि चाहे जमानत अर्जी मंज़ूर की जाए या फिर खारिज की जाए, लेकिन जमानत अर्जियों को इतने लंबे समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि ट्रायल कोर्ट में जमानत अर्जी को पच्चीस महीने से ज्यादा समय तक लंबित रखा।

उक्त तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपित को तत्लाक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया और यह भी निर्देश दिया कि आदेश की प्रति जेल अधीक्षक को तुरंत भेजी जाए।

अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि आरोपित ने दिसंबर 2024 में हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी और अर्जी तब से अलग-अलग पीठ ने मामले पर सुनवाई कई बार टाल दी थी। अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि अपीलकर्ता को वारदात में संलिप्तता के आधार पर अक्टूबर 2021 से न्यायिक हिरासत में है।

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