नोएडा वालों के लिए गुड न्यूज! एक्वा लाइन विस्तार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, दिल्ली-NCR में बढ़ेगी कनेक्टिविटी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/noida-aqua-1771059663850_m.webpनोएडा मेट्रो के एक्वा लाइन के विस्तार को कैबिंनेट की मंजूरी। फाइल फोटो
एएनआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शहरी परिवहन को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन के विस्तार को मंजूरी दे दी है। यह विस्तार Noida Metro Rail Corporation Limited द्वारा लागू किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत एक्वा लाइन को बोटैनिकल गार्डन से नोएडा सेक्टर-142 तक बढ़ाया जाएगा। लगभग 11.6 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में आठ नए एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में आवाजाही आसान होगी।
इंटरचेंज हब के रूप में बनेगा बोटैनिकल गार्डन स्टेशन
सबसे अहम बात यह है कि बोटैनिकल गार्डन स्टेशन एक प्रमुख इंटरचेंज हब के रूप में विकसित होगा, जहां से यात्रियों को Delhi Metro Rail Corporation की ब्लू और मैजेंटा लाइन से सीधा कनेक्शन मिलेगा। इससे दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा और भी सुगम हो जाएगी।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,254 करोड़ रुपये है और इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस विस्तार के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा का कुल मेट्रो नेटवर्क 61 किलोमीटर से अधिक हो जाएगा।
इससे पहले 11 फरवरी को दिल्ली सरकार ने भी राजधानी के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेट्रो फेज-V(A) को मंजूरी दी गई।
इस परियोजना के तहत 16 किलोमीटर लंबे तीन नए कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनमें 13 मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। पूरी योजना की लागत 12,014.91 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें दिल्ली सरकार का हिस्सा 2,940.46 करोड़ रुपये होगा। इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह परियोजना उनकी “7-C विजन”—कॉमन, कनेक्टेड, कन्वीनिएंट, कंजेशन-फ्री, चार्ज्ड, क्लीन और कटिंग-एज मोबिलिटी, को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
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