यूपी में बजट न पूरा खर्च हो रहा और न हो रही पूरी कमाई, धरातल पर नहीं उतरती योजनाएं
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/up-budget-1771044370904_m.webpअजय जायसवाल, लखनऊ। पिछले नौ वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार साल-दर-साल अपने बजट का आकार तो बढ़ाती जा रही है लेकिन किसी भी वित्तीय वर्ष में उसे शत-प्रतिशत इस्तेमाल नहीं किया जा सका है।
इतना ही नहीं खर्चे के लिए सरकार विभिन्न करों के माध्यम अपनी कमाई के लिए जितना वार्षिक लक्ष्य तय कर रही है उतना राजस्व भी सरकारी खजाने में नहीं आ रहा है। ऐसे में सरकार की वित्तीय सेहत पर भले ही कोई विपरीत असर न दिखाई दे लेकिन बजट में घोषणा के बावजूद तमाम विकास परियोजनाओं से लेकर लुभावनी योजनाओं के लटकने की आशंका तो रहती ही है।
इस बार 12.9 प्रतिशत अधिक का बजट
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 से लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक 9.13 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। गौर करने की बात यह है कि वर्ष 2017 से योगी सरकार के अब तक के कार्यकाल में पहली बार पिछले बजट से 12 प्रतिशत से कहीं अधिक की बढ़ोतरी इस बजट में की गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दसवें बजट से पहले के बजट में न्यूनतम सात से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होती रही है। योगी सरकार द्वारा वर्ष 2017-18 में पेश किया गया पहला बजट अखिलेश सरकार के अंतिम बजट से लगभग 11 प्रतिशत ज्यादा का था। कोरोना काल के दौरान बजट के आकार में सात प्रतिशत का ही इजाफा किया गया था। मौजूदा वित्तीय वर्ष का बजट पिछले बजट से 10 प्रतिशत ज्यादा है।
बजट का आकार बढ़ना एक तरह से राज्य की तेजी से सुधरती अर्थ व्यवस्था का परिणाम है लेकिन विधानमंडल से पारित बजट का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि बजट में तमाम योजनाओं-परियोजनाओं की घोषणाएं तो की जाती है, लेकिन धरातल पर सभी उतरती नहीं दिखाई देती।
बजट आकार और खर्च (करोड़ रुपये में)
वित्तीय वर्ष
कुल बजट
खर्च (प्रतिशत में)
2017-18
3,84,660
3,21,823 (84)
2018-19
4,28,384
3,91,211 (91)
2019-20
4,79,701
3,83,352 (80)
2020-21
5,12,861
3,78,711 (74)
2021-22
5,50,271
4,39,963 (80)
2022-23
6,15,519
5,05,905 (82)
2023-24
6,90,242
5,66,454 (82)
2024-25
7,36,438
6,03,248 (82)
2025-26
8,08,736
4,52,890 (56)
नोट-2025-26 के आंकड़े 31 दिसंबर तक के हैं।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान बजट का 82 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल नहीं किया गया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में तो लगभग एक-चौथाई बजट यूं ही पड़ा रह गया।
सरकार की कमाई भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं
कुल बजट का अब तक अधिकतम 91 प्रतिशत खर्च वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हो सका था। नौ वर्ष पहले योगी के सत्ता संभालने के बाद तेजी से विकास के कार्य आगे बढ़े थे, लेकिन उस समय भी बजट का 84 प्रतिशत ही खर्च हो सका था। इसी तरह सरकार की कमाई भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पा रही है।
चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने विभिन्न करों से 2.95 लाख करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा लेकिन 10 माह में 60 प्रतिशत यानी 1.79 लाख करोड़ रुपये ही सरकारी खजाने में आए हैं।
जीएसटी की दर आदि घटने से शेष दो माह में 1.16 लाख करोड़ रुपये न मिलता देख सरकार को अब कमाई का लक्ष्य ही 69 हजार करोड़ रुपये (23 प्रतिशत) घटाकर 2.26 लाख करोड़ रुपये करना पड़ा है। इसी तरह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी सरकार ने लक्ष्य तो 2.70 लाख करोड़ राजस्व हासिल करने का रखा था लेकिन उसकी कमाई 21.42 प्रतिशत घटकर 2.12 करोड़ रुपये ही रही।
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