शादी के बाद पहचान का संकट! प्रेम विवाह बना अंजलि के लिए मुसीबत, अब वोट डालने के लिए भटक रहे दंपत्ति
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/14/article/image/C-503-1-MBD1008-494477-1771010304380_m.webpविकास भवन के बाहर बैठे लोग
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। प्रेम विवाह करने वाले दंपतियों और टूटे पारिवारिक संबंधों वाले लोगों के लिए मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान एक नई मुसीबत बनकर सामने आया है। दस्तावेजों की कमी और मायके से जुड़े प्रमाण न होने के कारण कई महिलाएं अपनी पहचान और मताधिकार बचाने के लिए भटकने को मजबूर हैं।
कांठ रोड स्थित काजीपुर निवासी अजय कुमार ने दिल्ली के गोकुलपुरी की रहने वाली अंजलि से प्रेम विवाह किया था। दोनों के दो छोटे बच्चे हैं और वे सामान्य मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हाल ही में एसआइआर अभियान के दौरान अंजलि को नोटिस मिला, जिसमें मायके का पता, माता-पिता से जुड़े दस्तावेज और वोटर नंबर मांगा गया। अंजलि के माता-पिता का बचपन में ही निधन हो चुका है।
प्रेम विवाह के बाद परिवार से भी रिश्ते टूट गए। ऐसे में मायके से जुड़ा कोई भी व्यक्ति या प्रमाण उपलब्ध नहीं हो सका। नोटिस मिलने के बाद अंजलि अपने पति को पुराने ठिकाने की तलाश में दिल्ली भेजा, लेकिन वहां से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। निराश होकर वह लौट आई। भाई व अन्य स्वजन से भी पति का संपर्क नहीं हो सका।
शुक्रवार को अजय अपनी पत्नी को विकास भवन लेकर पहुंचे, जहां एसआइआर से जुड़ी सुनवाई चल रही थी। घंटों इंतजार के बाद भी समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर मामला लंबित कर दिया। इसी तरह जवाहर नगर निवासी शुभम की कहानी भी अलग नहीं है। उसकी शादी तीन साल पहले काशीपुर (उत्तराखंड) की शिवानी से हुई थी।
शुभम के माता-पिता का देहांत हो चुका है और उसकी परवरिश दादी ने की। उसे अंदाजा भी नहीं था कि पत्नी का वोट बनवाने के लिए माता-पिता से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जाएंगे। शिवानी ने शुभम को काशीपुर भेजा, जहां से वह दादी का आधार कार्ड और वोटर संख्या लेकर आया। इसके बावजूद शिवानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका।
दोनों पति-पत्नी अपने छोटे बच्चों को संभालते हुए रोज-रोज कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अजय और शुभम बताते हैं कि नोटिस मिलने के बाद से उनकी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। हम रोज कमाते हैं, तभी घर चलता है। लाइन में लगने के लिए काम छोड़ना पड़ता है, जिससे पूरे महीने का बजट बिगड़ जाता है।
विकास भवन में एसआइआर की सुनवाई तीन स्थानों पर चल रही है। पंचायती राज विभाग में अपर जिला पंचायत राज अधिकारी एक अकेली महिला का मामला देख रहे हैं, जिसे परिवार ने छोड़ दिया है और पति की मृत्यु हो चुकी है। महिला अपने माता-पिता की वोटर जानकारी तक नहीं जुटा पा रही है। प्रेमनगर निवासी शहाना भी दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी के कार्यालय के बाहर कतार में लगी मिलीं। वह मायके से वोटर लिस्ट निकलवाकर लाई हैं, जिसमें उसका और माता-पिता का नाम है, फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
उसकी समस्या के समाधान के प्रयास जारी हैं। जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी विजय यादव ने बताया कि एसआइआर के दौरान मैपिंग और सत्यापन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए टीमें लगी हैं। बीएलओ और सुपरवाइजर के माध्यम से लोगों को वोटर लिस्ट दिखाकर मदद की जा रही है। हमारा प्रयास यह है कि किसी को दिक्कत न होने पाए।
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