Chikheang Publish time 3 hour(s) ago

बांग्लादेश में रहमान सरकार, भारत में क्या होगा असर? रिश्तों को मजबूत करने में जुटी BNP

https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/BNG-(30)-1771001641889_m.webp

बांग्लादेश चुनाव परिणाम का भारत में क्या होगा असर रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश में BNP



जयप्रकाश रंजन, जागरण। बांग्लादेश के आम चुनाव में (बीएनपी) का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना और जमात-ए-इस्लामी का बहुमत से दूर रहना भारत के लिए संतुलित संकेत देता है। आवामी लीग की अनुपस्थिति में यह चुनाव नई राजनीतिक संरचना लेकर आया है, जिसमें तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने जा रही है।

मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ये परिणाम भारत के लिए संकट से अधिक अवसर का संकेत हैं। जानकारों का मानना है कि बीएनपी भारत को लेकर ज्यादा व्यावहारिक रुख दिखाएगा जो वास्तविक तौर पर आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित कर सकता है।
जमात बहुमत से दूर: सुरक्षा दृष्टि से राहत

बीएनपी के साथ भारत के रिश्ते अतीत में जटिल रहे हैं, फिर भी किसी भी परिस्थिति में जमात की प्रत्यक्ष सत्ता से यह स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित मानी जाएगी। जमात-ए-इस्लामी का वैचारिक झुकाव लंबे समय से पाकिस्तान समर्थक राजनीति और इस्लामी कट्टरपंथी धाराओं के निकट माना जाता रहा है।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/13/template/image/BNG-(31)-1771002040350.jpg

यदि उसे स्पष्ट बहुमत मिलता, तो भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर अस्थिरता, कट्टरपंथी नेटवर्क की सक्रियता और सीमा पार घुसपैठ जैसी चिंताएं बढ़ सकती थीं। अतीत में जमात ने भारत-विरोधी भावनाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाया है।

बहुमत से दूर रहना यह संकेत देता है कि बांग्लादेश की सत्ता पूरी तरह वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर नहीं गई है। इससे भारत को कम-से-कम अल्पकाल में सुरक्षा मोर्चे पर अतिरिक्त दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक संकट प्राथमिक चुनौती: सहयोग की अनिवार्यता

बांग्लादेश इस समय आर्थिक दबावों से गुजर रहा है, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, निर्यात क्षेत्र (विशेषकर रेडीमेड गारमेंट्स) पर दबाव, बढ़ती मुद्रास्फीति और रोजगार की चुनौती। ऐसे परि²श्य में बीएनपी सरकार की पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और निवेश विश्वास बहाल करना होगी।

भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले एक दशक में व्यापार और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऊर्जा सहयोग, बिजली निर्यात, पेट्रोलियम पाइपलाइन, रेल-रोड कनेक्टिविटी और बंदरगाह उपयोग जैसी परियोजनाएं दोनों देशों को व्यावहारिक रूप से जोड़ती हैं।

वर्ष 2020 के बाद वहां भारत की तरफ से लगभग पांच अरब डॉलर का निवेश हुआ है। नई सरकार के लिए इन परियोजनाओं को बाधित करना आर्थिक दृष्टि से नुकसानदेह होगा। बीएनपी के घोषणा पत्र में भारत के प्रति टकरावपूर्ण रवैया का कोई संकेत नहीं है।

पार्टी आर्थिक यथार्थ को समझते हुए संबंधों को व्यावहारिक आधार पर आगे बढ़ा सकती है। आर्थिक पुनर्निर्माण में भारत बाजार, निवेश और ऊर्जा आपूर्ति के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परस्पर निर्भरता: संबंधों की मजबूती

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल राजनीतिक समीकरणों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि वे संरचनात्मक रूप से जुड़े हैं। पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में बांग्लादेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। रेल मार्ग, अंतर्देशीय जलमार्ग, सड़क गलियारे और सीमा हाट जैसी व्यवस्थाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी हैं।

https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/02/13/template/image/BNG-(32)-1771002071591.jpg

इन परियोजनाओं को रोकना या धीमा करना ढाका के लिए भी आर्थिक रूप से घाटे का सौदा होगा। लाखों बांग्लादेशी ईलाज के लिए भारत पर निर्भर रहते हैं और द्विपक्षीय संबंधों में हाल के दिनों में आए तनाव से इनका काफी नुकसान हो रहा है।

ऐसे में वहां की नई सरकार आम जनता की जरूरतों को देखते हुए भारत के साथ सहयोग का रवैया अपना सकती है जो बीएनपी की छवि को मजबूत करेगा। इसलिए वह व्यावहारिक राजनीति संबंधों में निरंतरता बनाए रखने पर जोर दे सकती है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में रणनीतिक संतुलन

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। चीन की आर्थिक सक्रियता और पाकिस्तान के साथ उसके समीकरण क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में बांग्लादेश के लिए किसी एक धुरी पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिमपूर्ण होगा। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में एक स्थिर, विश्वसनीय और भौगोलिक रूप से निकट साझेदार के रूप में भारत का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।

ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आपदा प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन जैसे क्षेत्रों में सहयोग ढाका के हित में भी है। भारत की तरफ से भी बीएनपी के रुख को देखते हुए दोनों देशों के बीच चल रहे पुराने जटिल मुद्दों जैसे नदी जल बंटवारा आदि पर तेज फैसला किया जा सकता है।

रहमान की जीत पर पीएम मोदी के 3 शब्द: भारत के लिए चिंता या अवसर? Inside Story
Pages: [1]
View full version: बांग्लादेश में रहमान सरकार, भारत में क्या होगा असर? रिश्तों को मजबूत करने में जुटी BNP