10 वर्षों में CJI कार्यालय को मिलीं जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें, 2024 में आए सबसे ज्यादा मामले
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/SC-(87)-1771004000192_m.webp10 वर्षों में CJI कार्यालय को मिलीं जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें (फाइल फोटो)
माला दीक्षित, नई दिल्ली। कुछ संख्याएं अच्छी नहीं लगतीं, बल्कि चिंता पैदा करती हैं। कुछ ऐसी ही संख्या सामने आई है। वो है सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ मिली शिकायतों की।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) कार्यालय को पिछले दस वर्षों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों (सिटिंग जजों) के खिलाफ 8630 शिकायतें मिलीं। इनमें सबसे ज्यादा 1170 शिकायतें वर्ष 2024 में मिलीं, जबकि सबसे कम 518 शिकायतें 2020 में सीजेआई आफिस को प्राप्त हुईं।
अर्जुन मेघवाल ने दी जानकारी
यह जानकारी विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 13 फरवरी शुक्रवार को लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में लोकसभा को दी है। हालांकि यह नहीं बताया गया है कि इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। सामान्य तौर पर न्यायाधीशों के खिलाफ आने वाली शिकायतों का ब्योरा गोपनीय रखा जाता है।
इसी कारण आम जनता को पता नहीं चलता कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई। सिर्फ कुछ ही मामलों में जिनमें मामला ज्यादा आगे बढ़ जाता है तभी लोगों को पता चल पाता है।
न्यायाधीश यशवंत वर्मा का मामला
आजकल इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग की कार्रवाई लंबित है। अब शायद ये पहला मौका होगा जब उच्च न्यायपालिका के सिटिंग न्यायाधीशों के खिलाफ मिली शिकायतों का दस वर्ष का आंकड़ा पता चला है।
संसद सदस्य माथेश्वरन वीएस ने लोकसभा में विधि और न्याय मंत्री से सवाल पूछा था कि क्या सरकार को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के विरुद्ध भ्रष्टाचार जैसे अनौचित्यपूर्ण कार्यों के संबंध में प्राप्त शिकायतों के रिकार्ड या डाटाबेस रखने वाले किसी तंत्र की जानकारी है।
यदि हां तो विगत दस वर्षों में ऐसी कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं और उन पर वर्ष वार क्या कार्रवाई की गई। सवाल में ये भी पूछा गया था कि क्या सरकार का विचार उच्चतर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने, निगरानी करने और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिशा निर्देश जारी करने या कदम उठाने का है।
क्या-क्या पूछा गया?
यदि हां तो उसका ब्योरा क्या है। कुछ चीजें और भी पूछी गईं थी। इस सवाल के लिखित जवाब में विधि एवं कानून मंत्री ने लोकसभा को बताया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारत के संविधान में प्रतिष्ठापित है। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ मिली शिकायतों का निपटारा न्यायपालिका द्वारा एक आंतरिक तंत्र के माध्यम से किया जाता है।
हायर ज्यूडिशरी के लिए स्थापित आंतरिक प्रक्रिया के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों तथा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने के लिए सक्षम हैं। इसी तरह हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने के लिए सक्षम हैं।
सरकार ने बताया है कि हायर ज्यूडिशरी के न्यायाधीशों के खिलाफ सीपीजीआरएएमएस (सेंट्रलाइज पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मानीटरिंग सिस्टम) या किसी अन्य प्रारूप से मिली शिकायतों को भारत के मुख्य न्यायाधीश या हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को अग्रसारित किया जाता है, जो ऐसी शिकायतों को प्राप्त करने के लिए सक्षम हैं।
विधि मंत्री ने लोकसभा में दिए लिखित उत्तर में बताया है कि सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त सूचना के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को पिछले दस वर्षों के दौरान सिटिंग जजों के खिलाफ कुल 8630 शिकायतों प्राप्त हुई हैं। सरकार ने प्राप्त शिकायतों का वर्ष वार ब्योरा दिया है।
शिकायतों का वर्ष वार ब्योरा
[*]2016 - 729
[*]2017 - 682
[*]2018 - 717
[*]2019 - 1037
[*]2020 - 518
[*]2021 - 686
[*]2022 - 1012
[*]2023 - 977
[*]2024 - 1170
[*]2025 - 1102
स्त्रोत - लोकसभा प्रश्नोत्तर
बांग्लादेश में रहमान सरकार, भारत में क्या होगा असर? रिश्तों को मजबूत करने में जुटी BNP
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