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PU की प्रोफेसर रंजू बंसल ढूंढेंगी स्तन कैंसर का बेहतर इलाज, रिसर्च के लिए ICMR से मिला 65 लाख का प्रोजेक्ट

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प्रो. अंजू बंसल को कैंसररोधी दवाओं के विकास में लगभग तीन दशक का अनुभव।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) की प्रोफेसर रंजू बंसल स्तन कैंसर का बेहतर इलाज ढूंढेंगी। इसके लिए उन्हें इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से 65 लाख रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान मिला है।

इस तीन वर्षीय परियोजना के अंतर्गत प्रो. बंसल और उनकी टीम ऐसे नए स्टेरॉयड आधारित औषधीय अणुओं की रूपरेखा तैयार कर उनका विकास करेगी, जो उपचार प्रतिरोध की प्रक्रिया को निष्क्रिय कर सकें।

इस शोध कार्य में सह-अन्वेषक के रूप में डॉ. सिमरन प्रीत और डॉ. एके रेंगन भी शामिल रहेंगे। विकसित यौगिकों का परीक्षण विभिन्न कैंसर कोशिका पंक्तियों पर स्थापित जैविक परीक्षण पद्धतियों के माध्यम से किया जाएगा तथा उनकी प्रभावशीलता और क्षमता का मूल्यांकन पशु मॉडल पर भी किया जाएगा।
प्रो. रंजू वरिष्ठ औषधि रसायन विशेषज्ञ

प्रो. रंजू बंसल विश्वविद्यालय की वरिष्ठ औषधि रसायन विशेषज्ञ हैं। उन्हें कैंसररोधी दवाओं के विकास में लगभग तीन दशक का अनुभव है। उनके पूर्व अनुसंधान कार्यों के परिणामस्वरूप अत्यंत प्रभावी स्टेरॉयड एवं गैर-स्टेरॉयड एरोमाटेज़ अवरोधकों की खोज हुई, जिनकी क्षमता नैनोमोल स्तर पर पाई गई और जिन्हें औषधि Exemestane से अधिक प्रभावी बताया गया।

इन आविष्कारों के लिए उन्हें अमेरिका, यूरोप और जापान में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट भी प्राप्त हुए हैं। उन्हें University of Strathclyde में राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति के दौरान कोशिका संवर्धन आधारित जैविक परीक्षणों का उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। वर्तमान में वे आईसीएमआर द्वारा वित्तपोषित एक अन्य परियोजना का भी नेतृत्व कर रही हैं, जो अल्जाइमर रोग के लिए स्टेरॉयड आधारित अणुओं के विकास से संबंधित है।

प्रो. बंसल और उनकी टीम ने इससे पूर्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद जैसी संस्थाओं द्वारा समर्थित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण की हैं। यह नवीनतम अनुदान पंजाब यूनिवर्सिटी में जनस्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु चल रहे अनुसंधान प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा।
स्तन कैंसर विश्वभर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या

स्तन कैंसर विश्वभर में महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को दिए जाने वाले हार्मोन अवरोधक उपचार प्रारंभ में प्रभावी सिद्ध होते हैं, किंतु समय के साथ कैंसर इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन जाता है।

वर्तमान में ऐसी कोई एकल स्वीकृत औषधि उपलब्ध नहीं है, जो इस प्रतिरोध की समस्या का प्रभावी समाधान कर सके। इससे उपचार प्रणाली में एक बड़ी कमी बनी हुई है।
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