भीलवाड़ा में DNA रिपोर्ट पर सवाल, दुष्कर्म पीड़िता से भ्रूण का नहीं हुआ मेल; कोर्ट ने आरोपी को किया बरी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने आरोपी युवक को बरी कर दिया है। कारण यह रहा कि डीएनए जांच में आरोपी और पीड़िता के भ्रूण का मिलान नहीं हुआ। इतना ही नहीं, दोबारा जांच में भी रिपोर्ट पहले जैसी ही आई, जिससे अदालत ने पूरे मामले को गंभीर माना है।यह मामला गुलाबपुरा थाना क्षेत्र का है। नाबालिग पीड़िता दुष्कर्म के बाद गर्भवती हो गई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और मामले की जांच शुरू की थी। जांच के तहत पीड़िता, उसके माता-पिता और भ्रूण के डीएनए सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजे गए थे।
विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह के अनुसार, जांच रिपोर्ट में तीनों के डीएनए का आपस में मिलान नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य वैज्ञानिक परिस्थितियों में ऐसा होना संभव नहीं माना जाता।
दो बार जांच, दोनों बार नहीं मिला डीएनए
पहली डीएनए रिपोर्ट में पीड़िता और भ्रूण का डीएनए मेल नहीं खाया। इस पर अदालत ने दोबारा जांच के आदेश दिए। दूसरी बार भी न तो पीड़िता और भ्रूण का डीएनए मिला और न ही पीड़िता का डीएनए उसके माता-पिता से मेल खाया।
दोनों बार एक जैसी रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया। पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप और न्याय व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।
कोर्ट ने एसपी से मांगी रिपोर्ट
अदालत ने डीएनए सैंपल बदले जाने की आशंका जताई है। साथ ही एफएसएल विशेषज्ञ साक्षी को तलब किया गया है। कोर्ट ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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