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Green Hydrogen की दिशा में आइआइटी-आइएसएम का इलेक्ट्रोड इनोवेशन, उत्पादन होगा और अधिक किफायती

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ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित मैटेरियल। (साभार-आइआइटी-आइएसएम)



जागरण संवाददाता, धनबाद। देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने की दिशा में IIT(ISM) Dhanbad के वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के भौतिकी विभाग में कार्यरत फैकल्टी डॉ. एसके रियाजुद्दीन और उनकी टीम ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक कम लागत वाला और प्रभावी इलेक्ट्रोड मैटेरियल विकसित किया है। यह खोज ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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आज पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और बढ़ते प्रदूषण की दोहरी चुनौती से जूझ रही है। जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोल और गैस जहां ऊर्जा की जरूरत पूरी करते हैं, वहीं ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शुरू किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।

ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है। इसका उपयोग उर्वरक उद्योग, रिफाइनरी, स्टील और केमिकल उद्योगों में किया जा सकता है। आने वाले समय में यह ईंधन वाहनों, बिजली उत्पादन और भारी उद्योगों में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

डॉ. रियाजुद्दीन ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है। अभी पानी को बिजली की मदद से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करने की प्रक्रिया में महंगे धातु जैसे प्लेटिनम और रूथेनियम का उपयोग होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा हमने कम लागत वाले और आसानी से उपलब्ध तत्वों-मोलिब्डेनम, वैनेडियम, सल्फर और कार्बन का उपयोग कर एक नया कैटेलिस्ट तैयार किया है। यह मैटेरियल पानी को तोड़ने की प्रक्रिया को तेज करता है और कम ऊर्जा में बेहतर परिणाम देता है।

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टीम ने यह भी दिखाया कि साधारण सिलिकॉन सोलर सेल की मदद से सीधे सूर्य की रोशनी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाया जा सकता है। इससे साफ और सस्ती ऊर्जा उत्पादन का रास्ता और मजबूत होता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल(वाइली, 2026) में प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने में भी अहम साबित हो सकती है।
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