इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सीमा जागरण मंच का अभियान, राष्ट्रवाद की अलख और मतांतरण पर पैनी नजर
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/bahraich-matantaran-1770963327989_m.webpसंतोष श्रीवास्तव, बहराइच। भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों में तेजी से बढ़े डेमोग्राफी चेंज (जनसांख्यिकीय परिवर्तन) तथा मतांतरण और तस्करी की घटनाओं के बाद सीमा जागरण मंच ने कमान संभाली है।
संगठन की तरफ से वहां रहने वाले लोगों में राष्ट्रप्रेम जगाने की मुहिम चलाई जा रही है। ग्रामीणों को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वालों के प्रति आगाह करने के साथ संदिग्धों पर नजर बनाए रखने के तौर-तरीके बताए जा रहे हैं।
ऐसे लोगों को चिह्नित कर सूचना पुलिस अधिकारियों को देने की बात कही जा रही है। सीमा जागरण मंच के प्रांत संगठन मंत्री अमरनाथ ने बताया कि राष्ट्रवाद की अलख जगाना देश की एकता, संप्रभुता और सांस्कृतिक धरोहर (जैसे- हिंदू आस्था) को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक माना जाता है, जिसमें राष्ट्रवादी भावना (आर्थिक, सामाजिक, ऐतिहासिक) प्रमुख भूमिका निभाती है।
इसके साथ ही, संगठित या जबरन मतांतरण को राष्ट्र के विरुद्ध एक गंभीर चुनौती मानते हुए इस पर पैनी नजर रखी जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, पीलीभीत, लखीमपुर, सिद्धर्थनगर व महराजगंज जिले की सीमा नेपाल से सटी है।
इन जिलों की सीमा पर एसएसबी की 73 चेक पोस्ट है। सीमा से सटे 289 ग्राम पंचायतों में सीमा जांगरण मंच राष्ट्रवाद की अलख जगाने की मुहिम चला रहा है। नेपाल सीमा से सटे मिहींपुरवा विकासखंड के विशुनापुर, अंबा, फकीरपुरी, बर्दियां, सलारपुर मुर्तिहा, भगड़िया, गोपिया, जोगनिया, करमोहना, कांजीबाग, अयोध्या गांव, हरखापुर, रामपुरवा, सुजौली चहलवा चितलहवा, गौरापिपरा, सोगवा, पड़रिया, मटेरीकला, सोहनी बलाई गांव, मदारिया समेत अन्य गांवों में सीमा जागरण मंच अभियान चला रहा है।
उन्होने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध होकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों में राष्ट्रवादी भावना और सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता को अभियान के सहारे बढ़ाया जा रहा है।
उनकी मानें तो 1985 में स्थापित यह संगठन सीमांत क्षेत्रों के विकास, स्थानीय निवासियों को सशक्त बनाने के साथ राष्ट्रवाद की अलख जगा रहा है, जो देश की सीमाओं को सुरक्षित करने में सहायक है।
मंच का मुख्य उद्देश्य सीमा पर बसे लोगों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, सम्मान और सीमा प्रहरियों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना है। उनकी मानें तो यह संगठन सरकार के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं को सुलझाने और विकासात्मक कार्यों में भी सहयोग भी करता है।
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