कटक में अब नहीं चमकेगी लेजर लाइट, हाईकोर्ट ने डीजे और सजावटी रोशनी के लिए नई गाइडलाइन की जारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/odisha-highcourt-1770957944816_m.webpहाईकोर्ट ने डीजे और सजावटी रोशनी के लिए नई गाइडलाइन की जारी
संवाद सहयोगी, कटक। उड़ीसा हाईकोर्ट ने कटक में लेजर लाइट के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है और शहर में सजावटी लाइटिंग व डीजे साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदियां लागू की हैं। यह जानकारी गुरुवार को आधिकारिक सूत्रों ने दी।
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, जुलूसों में लेजर लाइट के उपयोग पर पूरी तरह रोक रहेगी और रात 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार की सजावटी रोशनी की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, समारोहों और जुलूसों के दौरान डीजे के उपयोग पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
डीजे साउंड सिस्टम को पूरी तरह प्रतिबंधित
तेज और उच्च-डेसीबल डीजे साउंड सिस्टम को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। अदालत ने कमिश्नरेट पुलिस को आदेश के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
ये निर्देश कटक शहर से जुड़े नागरिक और शहरी मुद्दों पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए, जिसमें अदालत ने ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
आवाज की तीव्रता से दिल की धड़कन तेज
वरिष्ठ अधिवक्ता बिभूति भूषण चौधरी ने कहा, “जब भी हम सड़कों पर होते हैं, डीजे की अत्यधिक आवाज का अनुभव सभी को होता है—चाहे बुजुर्ग हों, छोटे बच्चे हों या महिलाएं। हमारे लिए भी इसकी तीव्रता इतनी अधिक होती है कि दिल की धड़कन तेज हो जाती है।
जब हमने यह मुद्दा हाईकोर्ट में उठाया, तो वाहनों के भीतर से इस्तेमाल होने वाली लेज़र लाइट का विषय भी सामने रखा। ये लेज़र लाइट जब आंखों पर पड़ती हैं तो जलन होती है और आंखों से पानी आने लगता है। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई तक कटक डीसीपी क्षेत्र में लेज़र लाइट के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दिया है।”
डीजे और बैंड पार्टियों की आवाज 65 डेसीबल
उन्होंने आगे बताया कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही आदेश दे चुकी है कि डीजे और बैंड पार्टियों की आवाज 65 डेसीबल के भीतर रखी जाए। बैंड मालिकों को इसका सख्ती से पालन करना होगा।
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या डीसीपी कटक अपने पिछले हलफनामे में किए गए वादों का पालन कर रहे हैं और निगरानी की क्या व्यवस्था है। निगरानी प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई तक हलफनामे के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।
जुलूसों की अनुमति रात 10 बजे तक
इसके अलावा, जुलूसों की अनुमति रात 10 बजे तक ही है, लेकिन शहर में कहीं भी इस नियम का सख्ती से पालन नहीं हो रहा। यहां तक कि विवाह स्थलों पर भी डीजे बड़े साउंड सिस्टम पर रात 11 बजे या आधी रात तक चलते रहते हैं।
हाईकोर्ट ने डीसीपी को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई में हलफनामे के जरिए बताएं कि इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ओडिशा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में न्यायमूर्ति के.आर. महापात्र और न्यायमूर्ति वी. नरसिंह शामिल हैं।
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