जनता पर नहीं आएगा टैक्स बोझ, सरकारी कर राजस्व से कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देगी योगी सरकार
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/13/article/image/yogi-khushi-1770951059174_m.webpअजय जायसवाल, लखनऊ। प्रदेशवासियों पर किसी तरह के नये टैक्स का बोझ डाले बिना राज्य सरकार जीएसटी(वस्तु एवं सेवा कर), वैट व शराब से अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में जितनी कमाई करेगी उससे कहीं अधिक उसे अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर खर्च करना पड़ेगा।
अगले वित्तीय वर्ष में सरकार को खुद के कर राजस्व से कुल 3.34 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसमें से 2.69 लाख करोड़ रुपये सिर्फ जीएसटी-वैट व आबकारी शुल्क के तौर पर खजाने में आने की उम्मीद है जबकि वेतन-पेंशन बांटने के लिए सरकार को 2.85 लाख करोड़ रुपये चाहिए होंगे।
राज्य सरकार को अगले वित्तीय वर्ष में मिलने वाले कुल राजस्व 7.29 लाख करोड़ रुपये में से कर राजस्व की हिस्सेदारी 6.03 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। इसमें से 2.69 लाख करोड़ रुपये जहां केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी है।
वहीं 3.34 लाख करोड़ रुपये स्वयं के कर राजस्व(मौजूदा वित्तीय वर्ष से लगभग 39 हजार करोड़ रुपये ज्यादा) से मिलने का अनुमान लगाया गया है।
सरकार को विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली धनराशि में से सर्वाधिक 39.43 प्रतिशत हिस्सेदारी स्वयं के कर राजस्व की ही होती है। स्वयं के कर राजस्व में जीएसटी-वैट, स्टांप एवं निबंधन शुल्क, आबकारी, वैट, वाहन शुल्क, विद्युत देयक व भू-राजस्व हैं।
स्वयं के कर राजस्व में जीएसटी-वैट से ही सरकार को सर्वाधित राजस्व मिलता है। राज्य की आर्थिक व कारोबारी गतिविधियों में तेजी के मद्देनजर सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में जीएसटी से लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये ( सरकार के स्वयं के कर राजस्व का 44.83 प्रतिशत) और वैट से 48 हजार करोड़ रुपये(14.38 प्रतिशत) मिलने का अनुमान लगाया है।
अगर केंद्र सरकार ने विभिन्न वस्तुओं पर जीएसटी और राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल आदि पर वैट की दरें न बढ़ाई तो सरकारी खजाने में इन दोनों करों से सरकार को 1.98 लाख करोड़ रुपये(स्वयं के कर राजस्व का 59.21 प्रतिशत) मिलने का अनुमान है।
सरकार को खुद के कर से होने वाली कमाई में संपत्तियों की रजिस्ट्री आदि पर स्टांप ड्यूटी व निबंधन शुल्क के तौर पर 13.01 प्रतिशत और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन आदि से वाहन शुल्क के तौर पर 4.73 प्रतिशत कर राजस्व हासिल होने की उम्मीद है।
गौर करने की बात है कि अगले वित्तीय वर्ष में सरकार के खर्चे(राजस्व व्यय) का 1.83 लाख करोड़(27.5 प्रतिशत) हिस्सा वेतन व 1.02 लाख करोड़(15.3 प्रतिशत) पेंशन की अदायगी में ही जाने का अनुमान है।
वेतन-पेंशन का बढ़ता खर्च (करोड़ रुपये में)
वर्ष वेतन (करोड़ रुपये) पेंशन (करोड़ रुपये)
2025-26
1,51,969
71,171
2024-25
1,36,709
65,601
2023-24
1,26,782
62,457
2022-23
1,19,336
58,697
वित्तीय वर्ष 2026-27 में कर राजस्व
कर लक्ष्य (करोड़ रुपये)
जीएसटी व वैट
1,98,071
आबकारी
71,278
स्टांप
43,802
परिवहन
15,808
ऊर्जा
4715
भू-राजस्व
817
कुल
3,34,491
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