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इंदौर से देहरादून तक साइबर ठगी का नेटवर्क, कारपोरेट अकाउंट सबसे बड़ा हथियार

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ठगी के ग्रुप में चल रही चैट में देश के कई शहरों के नाम व देहरादून में एजेंट होने की जानकारी देता एजेंट।



अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। मोबाइल स्क्रीन पर अचानक एक मैसेज पाप-अप होता है, आपको प्रीमियम इन्वेस्टमेंट ग्रुप में जोड़ा गया है।

ग्रुप का नाम किसी नामी विदेशी कंपनी जैसा, प्रोफाइल फोटो में चमचमाता इंटरनेशनल लोगो और चैट बाक्स में हर कुछ मिनट में गिरते मुनाफे के स्क्रीनशाट।

कोई 50 हजार लगाकर पांच लाख कमाने का दावा कर रहा है, तो कोई दो लाख को 20 लाख बनाने की कहानी सुना रहा है।

यही वह चमकदार परदा है, जिसके पीछे बैठा था चीन में सक्रिय कथित सरगना किंग-पिन, जो भारत में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहा है।

साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह का सबसे अहम हथियार कारपोरेट बैंक अकाउंट हैं। ये खाते फर्जी दस्तावेजों या किराए के निदेशकों के नाम पर खुलवाए जाते हैं।

निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम पहले इन्हीं खातों में मंगाई जाती। इसके बाद रेजर-पे और अन्य पेमेंट गेटवे (जैसे टीएक्स प्लेटफार्म) के जरिए पैसा तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता, ताकि ट्रांजेक्शन को पकड़ना मुश्किल हो जाए।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में रकम को मिनटों के भीतर तीन से पांच खातों में घुमा दिया जाता था।

ठगी के ग्रुप में इंदौर, ग्वालियर, भुवनेश्वर, नासिक, देहरादून, जयपुर, चेन्नई, लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, पटना, पुणे, मुंबई, कोलकाता व उदयपुर में गैंग संचालित होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा कई बैंकों की सूची भी उपलब्ध कराकर खातों में पैसा डालने के लिए कहा गया है।
हवाला और यूएसडीटी से विदेश ट्रांसफर

पुलिस को मिले डिजिटल चैट और लेनदेन के सुराग बताते हैं कि ठगी से जमा की गई रकम को आगे हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशी खातों में ट्रांसफर किया जाता है।

इस प्रक्रिया में पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचने के लिए क्रिप्टो वालेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे धन का अंतिम गंतव्य ट्रेस करना बेहद जटिल हो जाता है।
वाट्सएप ग्रुप से चलता पूरा कंट्रोल रूम

जांच में जीटी नाइट ग्रुप और आल अकाउंट ग्रुप जैसे वाट्सएप ग्रुप सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में किंग-पिन सीधे भारतीय एजेंटों से संवाद करता है।

एक चैट में सरगना पूछता है, देहरादून से कौन है एजेंट। जवाब आता है, इंतजार करो, मैं अपनी डिटेल भेजता हूं। दूसरे ग्रुप में किंग-पिन निर्देश देता है कि इंडियन सिम कार्ड उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल आनलाइन फ्राड में किया जाना है।

यह भी सामने आया कि नए बैंक खाते खोलने के लिए फर्जी सिम कार्ड और जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि ओटीपी वेरिफिकेशन और केवाईसी प्रक्रिया को आसानी से पार किया जा सके।
जांच में क्या सामने आया

साइबर पुलिस ने अंडरकवर आपरेशन चलाकर इस नेटवर्क में एंट्री ली। डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और चैट रिकार्ड खंगालने के बाद कई संदिग्ध खातों की पहचान की गई।

प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। पुलिस अब मनी ट्रेल के जरिए मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में है। केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय किया जा रहा है।

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