गाजीपुर टोल प्लाजा बना मौत का जाल, तेज रफ्तार गाड़ियों पर अचानक ब्रेक; चल रही अवैध वसूली
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/12/article/image/fff-(71)-1770920282620_m.webpदिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजीपुर में निगम के इसी टोल पर हुआ था हादसा। जागरण
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां तेज रफ्तार से चलती हैं। ट्रैफिक सिग्नल न होने के बावजूद गाजीपुर पहुंचने पर ड्राइवरों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। निगम के कर्मचारी एक्सप्रेसवे के बीच में ही टोल वसूलते हैं। यह टोल ड्राइवरों के लिए खतरा बना हुआ है। गुरुवार सुबह यहां हुआ हादसा इसका जीता जागता उदाहरण है।
इस हादसे के बाद भी टोल कर्मचारी पहले की तरह सड़क के बीच में ही टोल वसूल रहे हैं। निगम ने कोई सबक नहीं सीखा है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि गाजियाबाद बॉर्डर के अंदर एक्सप्रेसवे पर कहीं भी कोई बड़ा साइनबोर्ड नहीं है, जो ड्राइवरों को दिल्ली में टोल प्लाजा की जानकारी दे सके। यह टोल प्लाजा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की रफ्तार में रुकावट डालता है।
कर्मचारी अचानक एक्सप्रेसवे पर कमर्शियल गाड़ियों को रोकने के लिए आ जाते हैं। कई बार तो गाड़ियां बेकाबू होकर अपनी और ड्राइवरों की जान को खतरे में डाल लेती हैं। टोल प्लाजा भी NH-9 पर एक्सप्रेसवे पर बने टोल प्लाजा के पास ही है। लेकिन यहां कैमरे के जरिए फास्टैग का इस्तेमाल कर टोल वसूला जाता है।
इस बीच, एक्सप्रेसवे पर कर्मचारी हाथ में मोबाइल फोन लेकर खड़े रहते हैं और टोल वसूलने के लिए गाड़ियों पर लगे फास्टैग को स्कैन करते रहते हैं। अक्सर, पीछे से आ रहे ड्राइवरों को यह पहचानने में दिक्कत होती है कि टोल प्लाजा पर कोई गाड़ी खड़ी है या चल रही है।
कार ड्राइवरों ने बताया कि रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी कई बार कह चुके हैं कि दिल्ली के बॉर्डर पर कॉर्पोरेशन के टोल प्लाजा हटा दिए जाने चाहिए। मिनिस्टर के आदेश के बावजूद, कॉर्पोरेशन इन प्लाजा को चालू रखे हुए है, जिससे ट्रैफिक जाम हो रहा है। फोन पर कॉर्पोरेशन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।
नो-एंट्री पीरियड खत्म होने के बाद ही मालवाहक गाड़ियां दिल्ली में एंट्री करती हैं। दिल्ली में मालवाहक गाड़ियों की एंट्री रात 10:00 बजे खुलती है। इससे पहले ही गाजियाबाद बॉर्डर पर गाजीपुर टोल पर मालवाहक गाड़ियों की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं।
यह कोई अकेली घटना नहीं है, रोजाना कतारें लगती हैं, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। कुछ महीने पहले गाजियाबाद में एक आदमी की मौत हो गई थी, जब वह सड़क किनारे खड़ी एक गाड़ी से टकरा गया था।
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