वसंतकुंज में 150 करोड़ रुपये से बनेगा मेट्रो का डिपो, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए दूसरा बड़ा टेंडर जारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/12/article/image/download-1770905798844_m.webpजागरण संवाददाता, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के बुधवार को प्रस्तुत बजट में मेट्रो के विस्तार के लिए 550 करोड़ रुपये का प्रविधान करने का असर गुरुवार को दिखायी दिया। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया। यूपीएमआरसी ने वसंतकुंज में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेट्रो डिपो का टेंडर जार कर दिया है। यह इस कॉरिडोर का दूसरा सबसे बड़ा टेंडर है। इससे पहले वसंतकुंज से ठाकुरगंज तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण का 492 करोड़ रुपये का टेंडर यूपीएमआरसी ने जारी किया था।
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली मेट्रो ट्रेनों के रखरखाव, जांच और उनकाे खड़ा करने के लिए यह डिपो बनाया जाएगा। यह मेट्रो का दूसरा डिपो होगा। अभी नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए ट्रांसपोर्ट नगर में डिपो बना है।
यूपीएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक डिपो में पहियों की मरम्मत के लिए पिट व्हील लेंथ मशीन, मेंटेनेंस के दौरान कोच को लिफ्ट करने और नीचे करने के लिए पूरी तरह आटोमेटिक सिंक्रोनाइज्ड पिट जैक मशीन, आटोमेटि सिंक्रोनाइज्ड मोबाइल जैक मशीन, बोगियों को एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर शिफ्ट करने के लिए बोगी टर्न टेबल, मेट्रो कोच की मशीन से तेज और प्रभावी सफाई के लिए आटोमेटिक ट्रेन वाशिंग प्लांट, डिपो परिसर में ट्रेनों को नियंत्रित तरीके से आगे-पीछे करने के लिए इलेक्ट्रिक बोगी शंटर, तकनीकी खराबी की स्थिति में कोच को जल्दी पटरी पर लाने के लिए री-रेलिंग एवं रेस्क्यू वाहन जैसी सुविधाएं डिपो में होंगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए डिपो में सोलर पावर यूनिट लगाई जाएगी। वर्तमान में लखनऊ मेट्रो में 3.122 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। डिपो में शून्य डिस्चार्ज सुवि, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट , ट्रेन की वाशिंग व मेंटनेंस से निकलने वाले पानी के उपचार के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी ), जल भंडारण प्रणाली की व्यवस्था भी होगी। लगभग 12 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट कारिडोर में सात भूमिगत और पांच एलिवेटेड स्टेशन होंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 5801.05 करोड़ रुपये है और निर्माण शुरू होने के बाद इसे पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
दूसरे बड़े टेंडर के जारी होने और प्री-कंस्ट्रक्शन कार्यों में तेजी से लखनऊ मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर कार्यान्वयन की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह शहर को एक मजबूत और बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदान करेगा।- सुशील कुमार, एमडी, यूपीएमआरसी
Pages:
[1]