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मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन पर बड़ी पहल, 36 गांवों में भूमि सीमांकन शुरू, लगेंगे पिलर

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यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। NH 122 Land Demarcation: मुजफ्फरपुर-बरौनी नेशनल हाईवे (एनएच-122, पूर्व में एनएच-28) को फोरलेन में तब्दील करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है।

परियोजना के तहत मुशहरी, कुढ़नी और सकरा अंचल के कुल 36 गांवों में भूमि सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।सीमांकन के बाद जमीन पर पिलर लगाए जाएंगे, ताकि निर्माण कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ सके और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।

अधिकारियों के अनुसार, एनएचएआई के निर्देश पर वर्ष 1960-65 के राजस्व नक्शों के आधार पर जमीन की पैमाइश की जा रही है। पहले चरण में सड़क की मौजूदा लगभग 150 फीट चौड़ाई का सत्यापन होगा। इसके बाद जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त भूमि का सीमांकन कर स्थायी पिलर स्थापित किए जाएंगे।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने संबंधित अंचलों में अमीनों की तैनाती के निर्देश जारी कर दिए हैं। अपर समाहर्ता (भू-अर्जन) स्तर से स्पष्ट किया गया है कि सीमांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इन अंचलों के गांवों में होगा सीमांकन

[*]मुशहरी अंचल के मिर्जापुर दीह, बरदाहा, मुशहरी बाजार, तरवारा, रघुनाथपुर, बैरिया समेत कई गांवों को शामिल किया गया है।
[*]सकरा अंचल के महमदपुर बुजुर्ग, हरपुर, रामपुर कृष्णा, सितो, नरपुर आदि गांवों में भी पैमाइश होगी।
[*]कुढ़नी अंचल के चयनित गांवों में भी राजस्व अभिलेख के आधार पर सीमांकन की प्रक्रिया चलेगी।


सीमांकन पूरा होते ही निर्माण एजेंसी को स्थल उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना मुजफ्फरपुर और बरौनी के बीच यातायात को सुगम बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
जाम से राहत और तेज आवागमन

फिलहाल यह मार्ग टू-लेन है, जबकि इस पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। लखनऊ से मुजफ्फरपुर तक सड़क फोरलेन या सिक्स लेन है, लेकिन मुजफ्फरपुर-बरौनी खंड संकरा होने से अक्सर जाम लगता है। फोरलेन बनने से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

बरौनी रिफाइनरी, उर्वरक कारखाना और थर्मल पावर स्टेशन के लिए कच्चे माल व तैयार उत्पादों की ढुलाई इसी मार्ग से होती है। बेहतर सड़क से लॉजिस्टिक्स आसान होगा।मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार की बड़ी मंडी है। लीची, अनाज व अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी होगी मजबूत

यह मार्ग ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का अहम हिस्सा है, जो दिल्ली-लखनऊ से गुवाहाटी तक जुड़ता है। फोरलेन बनने से पटना, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया जैसे जिलों के बीच संपर्क और बेहतर होगा।
सड़क सुरक्षा में सुधार

भारी वाहनों और संकरी सड़क के कारण इस रूट पर दुर्घटनाएं आम हैं। परियोजना के तहत 16 अंडरपास, 2 बड़े पुल और 16 छोटे पुल प्रस्तावित हैं। इससे स्थानीय आवागमन सुरक्षित होगा और हादसों में कमी आएगी।
मुजफ्फरपुर रिंग रोड से कनेक्शन

इस परियोजना के साथ ईस्टर्न रिंग रोड की भी योजना है। इससे दरभंगा, सीतामढ़ी और मोतिहारी की ओर से आने वाले वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे पटना या बरौनी जा सकेंगे, जिससे शहर के ट्रैफिक जाम में कमी आएगी।
परियोजना की वर्तमान स्थिति (2026)

करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना लगभग 102 किलोमीटर लंबी है। फिलहाल एनएचएआई द्वारा जमीन का सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यह फोरलेन परियोजना उत्तर बिहार के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगी और क्षेत्रीय विकास की रफ्तार को तेज करेगी।
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