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डॉक्टरों को एच1बी वीजा शुल्क से मिले राहत, 100 सांसदों ने की मांग देश-विदेश

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में एच1बी वीजा पर प्रस्तावित एक लाख डालर के नए शुल्क को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस के 100 सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने होमलैंड सुरक्षा (डीएचएस) मंत्री क्रिस्टी नोएम को पत्र लिखकर स्वास्थ्य क्षेत्र को इस शुल्क से छूट देने की मांग की है।

सांसदों ने चेतावनी दी है कि यह शुल्क लागू होने पर अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में पहले से मौजूद कर्मचारियों की कमी और गहरा सकती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने का खतरा है।11 फरवरी को भेजे गए पत्र में सांसदों ने संघीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका में करीब 8.7 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां पर्याप्त मेडिकल पेशेवर उपलब्ध नहीं हैं।

हेल्थ रिसोर्सेज एंड सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार अगले दशक में डाक्टरों की मांग आपूर्ति से 86,000 तक अधिक हो सकती है, जबकि क्लीनिकल लैब साइंस प्रोग्राम जरूरत के मुकाबले आधे से भी कम पेशेवर तैयार कर पा रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि घरेलू कार्यबल अकेले इस कमी को पूरा नहीं कर सकता और अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों की भर्ती पर अतिरिक्त बोझ से ग्रामीण व कम आय वाले शहरी अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

पत्र का नेतृत्व प्रतिनिधि यवेट क्लार्क और माइकल लारलर ने किया है, जबकि सीनेटर कि‌र्स्टन गिलिब्रैंड समेत कई सांसदों ने समर्थन दिया। अमेरिकी हास्पिटल एसोसिएशन और मेडिकल कालेजों के संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर वर्ष एच1बी वीजा स्वीकृतियों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है। बड़ी संख्या में भारतीय डाक्टर, शोधकर्ता और टेक्नोलाजी विशेषज्ञ अमेरिका की स्वास्थ्य और अनुसंधान व्यवस्था का हिस्सा हैं।

ऐसे में शुल्क बढ़ोतरी से न केवल अमेरिकी अस्पतालों पर असर पड़ सकता है, बल्कि भारतीय पेशेवरों के अवसरों और भारत-अमेरिका कौशल सहयोग पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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