ममता की मंत्री ने उधवा पर ठोक दिया दावा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच बढ़ेगा तनाव
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/12/article/image/Sahibganj-News-1770898996697_m.webpझारखंड के उधवा में सभा को संबोधित करतीं बंगाल की मंत्री सबीना यास्मीन। (फोटो जागरण)
संवाद सहयोगी, जागरण, उधवा (साहिबगंज)। Bengal Minister Claims Jharkhand Land: झारखंड और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच आने वाले दिनों में टकराव बढ़ सकता है। वजह ही ऐसी है। पश्चिम बंगाल के सिंचाई एवं जलमार्ग तथा उत्तर बंगाल विकास राज्य मंत्री सबीना यास्मीन ने झारखंड के साहिबगंज जिले के उधवा इलाके पर दावा ठोक दिया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनती है तो उधवा को बंगाल में शामिल करने की मांग पूरी करने के लिए वह पूरी ताकत के साथ प्रयास करेंगी।
सबीना यास्मीन पश्चिम बंगाल सरकार में एक प्रमुख तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेत्री हैं, जो उत्तर बंगाल विकास और सिंचाई एवं जलमार्ग राज्य मंत्री (Minister of State) के रूप में कार्यरत हैं। वह मालदा जिले की मोथाबारी विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक हैं और उत्तर बंगाल क्षेत्र के विकास कार्यों की देखरेख करती हैं। मालदा झारखंड के साहिबगंज और पाकुड़ जिले के नजदीक है।
गंगा कटाव संघर्ष समिति तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा उधवा के दक्षिण पलाशगाछी पंचायत के प्राणपुर बाजार में बुधवार को आयोजित समारोह में भाग लेने मंत्री सबीना यास्मीन पहुंचीं थीं। उन्होंने कहा कि उधवा की असर्वेक्षित भूमि पर मालिकाना हक तथा निवास प्रमाण पत्र के मुद्दे का हल नहीं निकलने पर यहां के लोग परेशान हैं।
कहा-मालदा के साथ यहां के लोगों का गहरा रिश्ता रहा है। हर सुख-दुख में पहले भी साथ थे और आज भी हैं। इसे और भी नजदीकी रिश्ते में बदलना चाहते हैं जिसमें आप सभी को साथ देना होगा। यास्मीन ने कहा कि झारखंड सरकार स्थानीय लोगों को केवल अस्थायी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजना झारखंड सरकार द्वारा संचालित की जा रही है लेकिन जमीन पर मालिकाना हक नहीं दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन जमीनों को पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन लाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी, ताकि प्रभावित आबादी को बंगाल सरकार की पूर्ण सुविधाएं मिल सके। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को चाहिए कि पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने में सहयोग करें।
ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनती है तो मैं इस मुद्दे पर उनके सहयोग से सम्मानित समाधान करा सकूंगी। मंत्री के इस बयान के बाद क्षेत्र में भूमि अधिकार, प्रशासनिक दावों और सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विदित हो कि उधवा की कई पंचायत जैसे दक्षिण व उत्तर पलाशगाछी, पश्चिमी व पूर्वी प्राणपुर, पियारपुर व श्रीधर मौजा के अधिकांश जमीन की रजिस्ट्री पश्चिम बंगाल के कालियाचक में होती है। उधवा अंचल के 11 से अधिक मौजा की आंशिक भूमि बंगाल सरकार के द्वारा लगभग 1922 एवं 1960 में सेटलमेंट किया गया था।
जमींदारी प्रथा उन्मूलन के दौरान 1966 में इसके अधिकांश मौजा का रजिस्टर टू झारखंड सरकार (तत्कालीन बिहार सरकार) को हस्तांतरित कर दिया गया लेकिन खतियान अर्थात मूल दस्तावेज पश्चिम बंगाल सरकार के पास ही रह गया जो वर्तमान में कालियाचक प्रखंड सह अंचल कार्यालय में है।
नतीजतन यहां के लोगों को निवासी प्रमाण पत्र बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। झारखंड सरकार द्वारा भी 25 वर्षों में कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। स्थानीय मोहम्मद इरफान, पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद हन्नान, तजबुल हक, जियाउल हक, मेहबूब शेख, आवेदिन शेख, मोहम्मद बदरुद्दीन, मोहम्मद अजहरुद्दीन सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने कहा कि हमें हमारा अधिकार चाहिए। अगर झारखंड सरकार द्वारा इस समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो पश्चिम बंगाल की ओर रुख करना हमारी मजबूरी होगी।
राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि बंगाल सरकार की मंत्री द्वारा झारखंड की भूमि पर दावा ठोकने के बाद दोनों राज्यों के बीच टकराव हो सकता है। झारखंड में हेमंत सोरेन और बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार चल रही है। हेमंत और ममता के बीच राजनीतिक रिश्ते मधुर है। लेकिन, इस मुद्दे को लेकर रिश्तों में खटास आ सकती है।
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