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रांची से दिल्ली तक गूंजेगी सरना कोड की आवाज, 17 फरवरी को जंतर-मंतर पर जुटेंगे देशभर के आदिवासी

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रांची से दिल्ली तक गूंजेगी सरना कोड की आवाज



जागरण संवाददाता, रांची। सरना धर्म कोड की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर आदिवासी सरना धर्मावलंबी 17 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। देशभर से सरना संगठनों के प्रतिनिधि इस आंदोलन में शिरकत करेंगे, जो रांची से शुरू होकर राष्ट्रीय राजधानी तक अपनी आवाज बुलंद करेगा।

टीएसी (ट्राईबल एडवोकेसी काउंसिल) सदस्य नारायण उरांव ने बताया कि सरना धर्मावलंबी प्राकृतिक पूजक हैं और इस देश के मूल मालिक आदिवासी समुदाय की संख्या करोड़ों में है, फिर भी उन्हें जनगणना के धर्म कॉलम में अलग स्थान नहीं दिया गया है। नारायण उरांव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रकृति-पूजा पर आधारित प्राचीन आदिवासी परंपरा

उन्होंने कहा कि सरना धर्म प्रकृति-पूजा पर आधारित प्राचीन आदिवासी परंपरा है, जो झारखंड सहित देश के कई राज्यों में लाखों-करोड़ों अनुयायियों के बीच प्रचलित है। इसके बावजूद, जनगणना में धार्मिक कालम नहीं मिली है।

उन्होंने ने जोर देकर कहा, सरना धर्म कोड न केवल हमारी धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी करता है। केंद्र सरकार से इसकी मांग की है। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, देश के विभिन्न जिलों से सरना संगठनों के कार्यकर्ता रांची में एकत्रित होकर 15 फरवरी को विशेष ट्रेनों से दिल्ली रवाना होंगे।
कई राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

जंतर-मंतर पर होने वाले धरने में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस बैठक में शिव कच्छप, राहुल तिर्की, संगीता कच्छप, नितेश उरांव सहित अन्य प्रमुख सरना नेता मौजूद रहे। शिव कच्छप ने कहा, यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरना को अलग धर्म कोड न मिल जाए। राहुल तिर्की ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस सांस्कृतिक संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लें।
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