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AI की दुनिया में भारत का `मिशन IAIRO`! देश के लिए अपना AI सिस्टम तैयार करने पर जोर, ChatGPT को देगा टक्कर


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज के समय में सिर्फ नई टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि दुनिया के देशों के लिए ताकत का पैमाना बनता जा रहा है. इसी को देखते हुए भारत ने भी AI के क्षेत्र में एक एक कदम बढ़ाया है. भारत ने मेड इन इंडिया AI को लेकर एक नई रिसर्च संस्था बनाई हैं. इसका नाम IAIRO रखा गया है. इस संस्था का काम भारत के लिए खुद के AI सिस्टम तैयार करना होगा. इसकी मदद से भारत विदेशी टेक्नोलॉजी पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. भारत सरकार चाहती है कि जैसे अंतरिक्ष की दुनिया में ISRO ने झंडे गाड़े हैं, ठीक वैसी ही अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में IAIRO काम करें.


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क्या करेगा IAIRO?
IAIRO भारत के लिए AI टेक्नोलॉजी को जमीन पर उतारने का काम करेगी. इसके द्वारा बनाई गई AI टेक्नोलॉजी सरकारी ऑफिस, इंडस्ट्रीज और जरूरी कामों के लिए इस्तेमाल की जाएगी. IAIRO खासतौर पर छोटे और जरूरत के हिसाब से बने AI मॉडल तैयार करेगा. यह संस्था विदेशी AI पर निर्भरता को कम करके 'मेड इन इंडिया' एआई सिस्टम विकसित करेगी. इसका काम भारत की जरूरतों और डेटा से जुड़ी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखना होगा.   



छोटे लेकिन असरदार मॉडल पर फोकस
दुनिया में बड़े-बड़े AI मॉडल की चर्चा होती है, लेकिन उन्हें चलाना महंगा और मुश्किल होता है. भारत का जोर ऐसे छोटे और खास काम के लिए बने AI मॉडल पर रहेगा, जो सस्ते हों और तेजी से काम करें. इसका मकसद टेक्नोलॉजी तक आम लोगों को पहुंचाना है.


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क्या है IAIRO?
IAIRO का पूरा नाम'इंडियन एआई रिसर्च ऑर्गनाइजेशन' हैं. अभी तक हम अपनी जरूरतों के लिए विदेशी AI मॉडल्स पर निर्भर थे, लेकिन अब भारत अपना खुद का 'मेड इन इंडिया' एआई ईकोसिस्टम तैयार करेगा. खास बात यह है कि यह सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर काम शुरू कर चुका है. इसे सरकार का ISRO स्टाइल प्रोजेक्ट माना जा रहा है. सरकार चाहती है कि AI के क्षेत्र में IAIRO वही पहचान बनाए, जो अंतरिक्ष में ISRO की है.


डेटा सुरक्षा पर खास ध्यान
AI का असली ईंधन डेटा होता है. ऐसे में यह जरूरी है कि भारतीय लोगों का डेटा सिक्योर रहे और देश के पास में हो. IAIRO इसी बात पर जोर देता है. IAIRO का काम है कि भारत के लोगों की संवेदनशील जानकारी देश के बाहर न जाए और AI सिस्टम भारतीय जरूरतों पूरा भी करें. IAIRO खास तौर पर स्वास्थ्य (Healthcare), शिक्षा (Education), खेती और सरकारी प्रशासन के लिए मॉडल्स तैयार करेगा. यह सस्ते होने के साथ इस्तेमाल में भी आसान होगा.



IAIRO की टीम में शामिल हैं कई बड़े लोग?
IAIRO को ग्लोबल लेवल का बनाने के लिए सरकार ने दुनिया भर से टैलेंट जुटाया है. इसकी एडवाइजरी बोर्ड में गूगल, एप्पल, एमेजॉन और आईबीएम (IBM) जैसी कंपनियों के पूर्व बड़े अधिकारी शामिल हैं. साथ ही आईआईटी गांधीनगर के निदेशक और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अजय चौधरी जैसे भारतीय दिग्गज भी इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं. IAIRO के संस्थापक निदेशक डॉ. अमित सेठ हैं.


ब्रेन ड्रेन रुकेगा, देश में मिलेगा काम
AI के क्षेत्र में काम करने के लिए भारत के पास बड़ी संख्या में युवा वर्ग हैं. अक्सर भारत के बेहतरीन इंजीनियर और वैज्ञानिक विदेश चले जाते हैं. IAIRO के आने से देश के युवाओं को घर बैठे ही वर्ल्ड क्लास प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा. डॉ. सेठ का मानना है कि एआई अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का हिस्सा है. भारत की यह पहल अपने लोगों को देश में ही काम देने की है.

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