गरीबों के नाम पर करोड़ों की टैक्स चोरी, यूपी पुलिस ने धनबाद से 8 लोगों को पकड़ा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/26/article/image/UP-police-Raid-In-Dhanbad-1769439466519_m.webpऔरैया कोतवाली में दर्ज मामले में पुलिस ने धनबाद के निरसा में की कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, निरसा (धनबाद)। फर्जी शेल कंपनी बनाकर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी करने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने धनबाद के निरसा क्षेत्र से आठ लोगों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तार लोगों को यूपी ले जाने की तैयारी की जा रही है। मामले की जांच औरैया कोतवाली थाना में दर्ज कांड संख्या 543/25 के तहत चल रही है।
बताया जाता है कि औरैया कोतवाली की पुलिस बीते तीन दिनों से निरसा और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर रही थी। यूपी के इटावा जिले के राज्य कर अधिकारी वीरी सिंह ने 30 जुलाई 2025 को कर चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच में फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का खुलासा हुआ।
इन लोगों को किया गया गिरफ्तार
पुलिस ने निरसा थाना क्षेत्र के बंगाल पाड़ा निवासी उमेश मालाकार, प्रदीप शर्मा, अनिल शर्मा, कन्हाई साव, अंजीत ठाकुर, गणेश बाउरी तथा भालजोरिया रोड निवासी बबलू रजक को हिरासत में लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार गिरफ्तार अधिकांश व्यक्ति बेहद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं-कोई खैनी बेचता है, कोई ऑटो चलाता है, तो कोई दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाता है।
रोजगार के नाम पर लिए गए दस्तावेज
गिरफ्तार लोगों ने पुलिस को बताया कि मैथन मेढ़ा दुर्गा मंदिर के पास रहने वाले श्याम सुंदर पासवान नामक व्यक्ति ने उन्हें कोऑपरेटिव सोसाइटी के नाम पर सरसों तेल मिल खोलने का झांसा दिया था। नौकरी देने का भरोसा दिलाकर उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी ले लिए गए।
बताया गया कि काम लगने तक ₹5000 प्रतिमाह देने की बात कही गई थी। आरोप है कि करीब एक वर्ष तक नकद भुगतान भी किया गया, जिससे लोगों को शक नहीं हुआ।
बाद में पैसे मिलना बंद हुआ तो कुछ लोगों ने अपने दस्तावेज वापस मांगे, लेकिन तब तक उनके नाम पर कंपनियां खोलकर जीएसटी चोरी की जा चुकी थी। गिरफ्तार लोगों का कहना है कि उन्हें जीएसटी या कंपनी संचालन की कोई जानकारी नहीं है और वे खुद को ठगी का शिकार बता रहे हैं।
50 से अधिक लोग हो सकते हैं शिकार
सूत्रों के अनुसार निरसा-चिरकुंडा क्षेत्र के लगभग 50 लोगों से इसी तरह दस्तावेज लेकर फर्जी कंपनियां बनाई गई हैं। जांच एजेंसियां इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।
परिजनों से लिखवाया गया सहमति पत्र
जानकारी यह भी मिली है कि यूपी पुलिस ने परिजनों से लिखवाया कि गिरफ्तार लोग जांच में सहयोग के लिए स्वेच्छा से यूपी जा रहे हैं। मामले में पुलिस आधिकारिक रूप से कुछ भी बताने से बच रही है, लेकिन जांच में बड़े टैक्स फर्जीवाड़े के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
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