चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई, बंगाल में एक और अधिकारी पर गिरी गाज
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/26/article/image/ED-1769421248099_m.webpपश्चिम बंगाल में ईडी का बड़ा एक्शन। फाइल फोटो
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाल में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही और अनियमितता सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। बंगाल में एक और अधिकारी पर गाज गिरी है। आयोग ने उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट-2 ब्लाक के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ)व सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ ) सुमित्रप्रतिम प्रधान को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) करने का आदेश जारी किया है।
मुख्य सचिव को दिया कड़ा निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र भेजकर सुमित्रप्रतिम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने निर्देश दिया है कि अधिकारी को न केवल सस्पेंड किया जाए, बल्कि उन्हें मतदाता सूची से संबंधित सभी कार्यों से तुरंत हटा दिया जाए।
साथ ही, उनके खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोपों की विभागीय जांच भी शुरू करने का आदेश दिया गया है। आयोग ने मुख्य सचिव को इन निर्देशों के पालन की जानकारी देने के लिए 48 घंटे की समय सीमा तय की है।
अवैध नियुक्तियों पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आयोग ने संबंधित अधिकारी द्वारा की गई सभी सुनवाइयों को रद कर दिया है। आरोप है कि बीडीओ सुमित्रप्रतिम प्रधान ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों के विरुद्ध 11 सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त एईआरओ के रूप में नियुक्त कर दिया था।
इन कर्मचारियों ने मतदाता सूची संशोधन के लिए कई सुनवाई की थीं, जिन्हें अब चुनाव आयोग ने अवैध घोषित कर दिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल को सूचित किया गया है कि ये सभी सुनवाई अब नए सिरे से और वैध अधिकारियों की देखरेख में की जाएंगी।
लापरवाही पर जेल और जुर्माने की चेतावनी
इस कार्रवाई के साथ ही चुनाव आयोग ने एक कड़ा संदेश भी जारी किया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि मतदाता सूची के कार्य में किसी भी प्रकार की जानबूझकर की गई गलती या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यदि चुनावी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। बताते चलें कि इससे पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में राज्य के चार और अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया था।
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