शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग करता रहेगा JMM, विनोद पांडेय ने पद्म भूषण सम्मान का किया स्वागत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/vinod-pandey-jmm-1769359694164_m.webpझामुमो महासचिव विनोद पांडेय। (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, रांची। झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर भारत सरकार के निर्णय का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने हाशिये पर खड़े आदिवासी समाज को देश की मुख्यधारा में आवाज दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी की जीवन-यात्रा और योगदान को देखते हुए भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी।
झामुमो महासचिव ने कहा कि झारखंड विधानसभा ने पूर्व में सर्वसम्मति से गुरुजी को भारत रत्न दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था।
गुरुजी की विरासत झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के सामाजिक न्याय के संघर्षों में एक अमिट अध्याय बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरू का जीवन, उनका संघर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में हाशिये पर जीवन जीने को मजबूर आदिवासी-मूलवासी समाज को आवाज दिया।
बाबा भारत के अनमोल रत्न थे, वे भारत रत्न के सच्चे मायनों में हकदार हैं। शायद ही किसी आदिवासी व्यक्ति को यह सम्मान अब तक मिला है।
वैसे भारत सरकार ने दिशोम गुरुको पद्म विभूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया है इसके लिए उन्हें साधुवाद, लेकिन दिशोम गुरूजी के करोड़ों समर्थक चाहेंगे कि उन्हें भारत रत्न मिले।
चार दशकों तक झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे गुरुजी
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उनके जीवन ने संघर्ष का मार्ग चुना।
महाजनी शोषण, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उन्होंने आंदोलन खड़ा किया और ग्रामीणों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके जीवन का केंद्रीय उद्देश्य रहा। नशा मुक्ति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने आदिवासी-मूलवासी समाज को नई दिशा दी। गुरुजी चार दशकों तक झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे।
वे तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और दुमका से आठ बार सांसद चुने गए। राज्यसभा सदस्य और केंद्र में मंत्री के रूप में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई। चार अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संघर्ष और विचार आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
यह भी पढ़ें- झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान, राज्य में खुशी की लहर
Pages:
[1]