गुरुग्राम का क्लब धमाका केस, गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नेटवर्क से जुड़े आरोपित फौजी को जेल में ही रहना होगा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/NIAA-1769350905135_m.webpपंचकूला की एनआईए विशेष अदालत ने जमानत याचिका की खारिज।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। पंचकूला की एनआईए विशेष अदालत ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ से जुड़े आतंकी नेटवर्क मामले में आरोपित अंकित कुमार उर्फ फौजी की डिफाल्ट जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपित के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए उसे डिफाल्ट बेल का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
यह मामला 10 दिसंबर 2024 को गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित क्लब मार्केट में हुए बम धमाके से संबंधित है, जिसने इलाके में दहशत फैला दी थी। धमाके के बाद पुलिस ने सचिन तलियान नामक युवक को दो देसी बम, पिस्टल और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने खुद को कुख्यात गैंगस्टर और घोषित आतंकी गोल्डी बराड़ का आदमी बताया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह हमला क्लब मालिकों को धमकाने और गैंग के लिए उगाही तथा आतंक फैलाने के उद्देश्य से किया गया था।
हरियाणा पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद मामला एनआईए को सौंपा गया। जांच के दौरान अंकित कुमार उर्फ फौजी को भी इस साजिश में शामिल पाया गया और उसे 11 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया। आरोपित पर यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज है।
अंकित कुमार ने अदालत में दलील दी कि 180 दिन की अवधि पूरी हो चुकी है और जांच अधूरी है, इसलिए उसे डिफाल्ट जमानत मिलनी चाहिए। हालांकि, एनआईए ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी कर 6 जून 2025 को चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। आगे की जांच केवल अन्य आरोपितों, जिनमें गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े फरार आरोपित रोहित गोदारा और रामदत्त शामिल हैं, के खिलाफ चल रही है।
विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद डिफाल्ट जमानत का अधिकार समाप्त हो जाता है, भले ही अन्य आरोपितों के खिलाफ आगे की जांच जारी हो। अदालत ने माना कि यह मामला एक संगठित गैंगस्टर-आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य धमाके कर लोगों में भय फैलाना और अवैध वसूली करना है।
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