LHC0088 Publish time 1 hour(s) ago

आउटर रिंग रोड पर जाम का ‘एलिवेटेड’ समाधान, केशोपुर से हैदरपुर तक बनेगा 17 किमी लंबा कॉरिडोर

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/24/article/image/FLYOVER-1769263857210_m.webp

केशोपुर डिपो से हैदरपुर तक साढ़े 17 किलोमीटर लंबा बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर। जागरण ग्राफिक्स



राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। आउटर रिंग रोड पर यातायात जाम में कमी लाने के लिए केशोपुर डिपो से हैदरपुर तक 17 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कारिडोर बनेगा। इस परियाेजना का काफी हिस्सा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के सप्लीमेंट्री ड्रेन के साथ बनेगा, इस योजना पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) काम करेगा।

पीडब्ल्यूडी ने इसके लिए 9,05,53,996 रुपये की लागत से परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन कराने की मंजूरी दे दी है और इसके लिए जल्द टेंडर जारी होगा। माना जा रहा है कि इस परियोजना से आउटर रिंग रोड पर बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

सलाहकार कंपनी कार्य दिवसों में सभी श्रेणियों के वाहनों का 24 घंटे का यातायात सर्वेक्षण करेगी। जिसमें मोड़ों की आवाजाही और चौराहों पर वाहनों के वर्गीकरण को शामिल किया जाएगा।
लाखों लोगों को सीधी राहत

प्रस्तावित फ्लाईओवर से केशोपुर, हैदरपुर, पंजाबी बाग, पीतमपुरा, शालीमार बाग, रोहिणी और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के आसपास के इलाकों के लाखों यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से व्यस्त समय में भीषण यातायात जाम की समस्या से जूझ रहे हैं।

यह परियोजना आउटर रिंग रोड पर मौजूद प्रमुख बाटलनेक को दूर करने, जिलों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने और रोज़ाना आफिस जाने वाले लोगों, सार्वजनिक परिवहन, वाणिज्यिक वाहनों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

यह भी पढ़ें- अब मोहम्मदगंज में भी रुकेगी रांची–नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस, हजारों यात्रियों को मिलेगी राहत

व्यवहार्यता अध्ययन में बिजली, पानी और टेलीफोन की भूमिगत और ऊपरी लाइनों, पेड़ों के स्थान, आरक्षित हरित स्थानों व पार्कों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान भी की जाएगी। परियोजना को आसपास के सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन और विरासत क्षेत्रों का अध्ययन किया जाएगा।

कंसल्टेंट जियो-टेक्निकल जांच करेगा और प्रस्तावित एलिवेटेड सेक्शन के लिए एक किमी की दूरी पर बोर होल किए जाएंगे और अंडरपास की जगह पर दो बोर होल किए जाएंगे। बोर होल की गहराई कम से कम 35 मीटर होगी।

इसमें फुटपाथ,साइकिल ट्रैक, पार्क, बगीचे और अर्बन प्लाजा, कमर्शियल,फूड कोर्ट, सांस्कृतिक व कार्यक्रम स्थल और पार्किंग क्षेत्र को भी देखना है।
किया जाएगा लाभ विश्लेषण

पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि व्यवहार्यता अध्ययन का उद्देश्य आउटर रोड पर यातायात जाम का समाधान ढूंढना है, जो घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने वाला एक महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क है।

सलाहकार कंपनी कार्य दिवसों में सभी श्रेणियों के वाहनों का 24 घंटे का यातायात सर्वेक्षण करेगा, जिसमें मोड़ों की आवाजाही और चौराहों पर वाहनों के वर्गीकरण को शामिल किया जाएगा।

परामर्शदाता भवनों और अतिक्रमणों का सर्वेक्षण भी करेंगे तथा योजना की आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लागतों को ध्यान में रखते हुए लागत लाभ विश्लेषण भी करेंगे।

यह भी पढ़ें- हथियार कारोबारी संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में वाड्रा पर सुनवाई टली, ED को दस्तावेज दाखिल करने के निर्देश







इस परियाेजना पर दिल्ली के उन लाखों नागरिकों की रोज़मर्रा की परेशानियों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध किया जा रहा है, जो वर्षों से यातायात जाम झेल रहे हैं। केशोपुर, हैदरपुर, पंजाबी बाग, पीतमपुरा, शालीमार बाग और पूरी रोहिणी बेल्ट पर भारी यातायात का दबाव रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में हमारी सरकार ठोस इरादे के साथ आगे बढ़ रही है। पहले ठोस योजना, फिर तेज़ क्रियान्वयन और फिर समस्या का स्थायी समाधान होगा। अब अधूरी और जल्दबाज़ी में बनाई गई परियोजनाओं का दौर खत्म हो चुका है।
-

प्रवेश वर्मा, मंत्री, लोक निर्माण विभाग
Pages: [1]
View full version: आउटर रिंग रोड पर जाम का ‘एलिवेटेड’ समाधान, केशोपुर से हैदरपुर तक बनेगा 17 किमी लंबा कॉरिडोर

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com