राष्ट्रपति भवन के ‘ग्रंथ कुटीर’ में सजीं 11 शास्त्रीय भाषाओं की 2300 से ज्यादा किताबें और पांडुलिपियां
देश की धरोहर और सभ्यता की विरासत को सहेजने की कोशिश में एक कदम आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया है। इसमें राष्ट्रपति भवन में दशकों से रखे ब्रिटिश युग के औपनिवेशिक साहित्य की जगह 11 शास्त्रीय भाषाओं में भारतीय साहित्य को शामिल किया गया है। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश-काल के एडीसी के चित्रों को देश के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों से बदला गया था। ग्रंथ कुटीर के संग्रह में शामिल भारतीय शास्त्रीय ग्रंथ में संस्कृत में वेद, पुराण और उपनिषद, गाथासप्तशती, सबसे पुराना ज्ञात मराठी साहित्य, पाली में विनय पिटक है, जैन आगम और प्राकृत शिलालेख हैं।इस संग्रह का उद्देश्य नागरिकों के बीच भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। गैलरी के उद्घाटन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शास्त्रीय भाषाओं ने भारतीय संस्कृति की नींव रखी है। उन्होंने कहा, “भारत की शास्त्रीय भाषाओं में रचित विज्ञान, योग, आयुर्वेद और साहित्य के ज्ञान ने सदियों से दुनिया का मार्गदर्शन किया है। तिरुक्कुरल और अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथ आज भी प्रासंगिक हैं।“ मुर्मू ने आगे कहा कि इन भाषाओं के माध्यम से गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और व्याकरण का विकास हुआ है।
President Droupadi Murmu inaugurated Granth Kutir at Rashtrapati Bhavan. Granth Kutir has a rich collection of manuscripts and books in 11 classical languages of India. The aim of developing the Granth Kutir is to enhance awareness among the citizens regarding the rich cultural… pic.twitter.com/TanJ9lVe0B — President of India (@rashtrapatibhvn) January 23, 2026
ग्रंथ कुटीर 2,300 किताबों का संग्रह
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ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में 2,300 किताबों का संग्रह है। ग्रंथ कुटीर में इन भाषाओं में महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान और भक्ति साहित्य के साथ-साथ भारत के संविधान जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। 50 पांडुलिपियां भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। इनमें से कई ताड़ के पत्ते, कागज, छाल और कपड़े जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हाथ से लिखी गई हैं। इसमें चर्यापद भी हैं, जो असमिया, बंगाली और ओडिया भाषाओं में प्राचीन बौद्ध तांत्रिक ग्रंथ हैं। तिरुक्कुरल, जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्लासिक तमिल ग्रंथ, तेलुगु में महाभारत, कन्नड़ में अलंकार, काव्य और व्याकरण पर सबसे पुराना उपलब्ध कार्य कविराजमार्ग और मलयालम में रामचरितम।
ब्रिटिश काल के ग्रंथों को अलग जगह रखा
राष्ट्रपति मुर्मू ने शुक्रवार को ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घान किया, जिसमें 2,300 किताबों का संग्रह है। “विलियम होगार्थ के मूल कार्यों की एक सूची“; “केडलस्टन के लॉर्ड कर्जन के भाषण“; “केडलस्टन के लॉर्ड कर्जन के प्रशासन का सारांश“ और “लॉर्ड कर्जन का जीवन“ जैसे पहले के ग्रंथों के संग्रह की जगह 11 शास्त्रीय भाषाओं में भारतीय साहित्य ने ली है। ब्रिटिश शाही नेतृत्व की प्रशंसा करने वाले इन ग्रंथों को अब राष्ट्रपति भवन परिसर के अंदर एक अलग जगह पर ले जाया गया है और उन्हें डिजिटाइज किया गया है।
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