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दिल्ली में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव: राजस्व जिलों के अनुसार बंटेंगी सभी विभागीय सेवाएं, दफ्तरों के चक्कर होंगे कम

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दिल्ली कैबिनेट से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में नए राजस्व जिलों के आधार पर ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और जल बोर्ड के भी इलाके बंटेंगे। इसके साथ ही अन्य विभागों का जिला स्तर पर बंटवारा किया जाएगा। यहां तक कि दिल्ली पुलिस के जिले भी राजस्व जिले के अनुसार बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस के जिले बनाने के मामले में अपराधों की स्थिति का भी आंकलन किया जाएगा। फिलहाल, आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए इस समय दिल्ली में पुलिस के 15 जिले हैं।
प्रशासनिक व्यवस्थाएं और बेहतर हो सकेंगी

दरअसल, दिल्ली सरकार का मानना है राजस्व जिलों के अनुसार अन्य व्यवस्थाएं भी जिलों के अनुसार निर्धारित करने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं और बेहतर हो सकेंगी और जनता को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। दिल्ली में अभी तक अन्य राज्यों की तरह न तो डीएम को प्रशासनिक अधिकार थे और ना ही राजस्व विभाग के जिलों के अनुसार की व्यवस्थाएं थीं। सरकार ने इस पर काम करते हुए जिलों के डीएम का अधिकार बढ़ाए हैं और सभी अन्य व्यवस्थाएं भी राजस्व जिलों के अधिकार क्षेत्र के अनुसार बनाने का फैसला लिया है।
प्रशासनिक दबाव कम करने का प्रयास

इसके तहत सबसे पहले नगर निगम के जोन के अनुसार राजस्व जिलों की सीमाओं को निर्धारित किया गया है। कुछ समय पहले जिलों का पुनर्गठन किया गया है। दिल्ली में 11 से बढ़ाकर 13 जिले) बनाए गए हैं। प्रशासनिक कार्यों को सुव्यवस्थित और तेज बनाने के लिए किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बढ़ते शहरीकरण के बीच प्रशासनिक दबाव कम करना और सेवाओं की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट की मंजूरी मिली

सरकार मानना है कि इससे निवासियों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार की योजना जिला स्तर पर ही जल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग का कार्यालय बनाने की भी है। इसके लिए सभी जिलों के स्तर पर मिनी सचिवालय बनाने की सरकार कैबिनेट की मंजूरी दे चुकी है।
सभी जिलों में जिला अदालत

इस सब के बीच अदालती कामकाज को लेकर समाजसेवी संस्था सेंटर फाॅर यूथ कल्चर, ला, एंड इंवायरमेंट ने सभी जिलों में जिला अदालतें बनाए जाने की भी मांग उठा दी है। संस्था ने 2012 की दिल्ली सरकार की एक अधिसूचना का भी हवाला दिया है जिसमें सभी जिला स्तर पर जिला अदालतें बनाए जाने की बात कही गई थी, मगर इसे आज तक लागू नहीं किया जा सका है।

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