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गले की हर गांठ नहीं होती Tuberculosis, टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट मुंबई व देशभर से आए विशेषज्ञों ने दी आवश्यक जानकारी

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कैंसर निदान के लिए प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल काॅलेज में आंकोपैथोलॉजी कार्यशाला में जुटे देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव।



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज में तीन दिवसीय आंकोपैथोलॉजी कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने शनिवार को अपने अध्ययन बताए। टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट मुंबई से आए प्रोफेसर डॉक्टर सुमित गुजराल ने कहा कि गले की हर गांठ ट्यूबरकुलोसिस नहीं होती है। गांठ की बायोप्सी करके लिंफोमा की स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए, उसके बाद ही इलाज का प्रबंध होना चाहिए।
थायराइड कैंसर में बायोप्सी की भूमिका : डाॅ. शुभदा

टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट मुंबई से ही आए पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर शुभदा काने ने बताया कि थायराइड कैंसर में बायोप्सी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी रिपोर्ट में यह दिशा मिलती है कि इलाज किस विधि से किया जाए। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रीतमदास ऑडिटोरियम में वैज्ञानिक गोष्ठी हुई। पैथोलॉजी के क्षेत्र में हो रही नवीन प्रगति एवं आधुनिक निदान तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया गया।
कैंसर निदान में इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री की भूमिका पर चर्चा

कार्यशाला में गिल्टियों के कैंसर (लिम्फोमा), थायरॉयड कैंसर, गर्भाशय के कैंसर, गुर्दे के कैंसर, आंत के कैंसर एवं स्तन कैंसर के केस की स्लाइड प्रदर्शित कर इनकी जटिलता, निदान में आने वाली कठिनाइयों व नई जांच प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई | कैंसर निदान में इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री की भूमिका पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव एवं विचार प्रस्तुत किए। प्रमुख वक्ताओं में डॉ. सुमित गुजराल, डॉ. शुभदा काने, डॉ. प्रवीण महाजन, डॉ. दिव्या मिधा, डॉ. सुभाष यादव, डॉ. एम.सी. शर्मा, डॉ. नुज़हत हुसैन एवं डॉ. आसावरी पाटिल शामिल रहे।
वैज्ञानिक गोष्ठी से आम जनता को बेहतर लाभ मिलेगा

विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता डॉ. वत्सला मिश्रा, डॉ. शालिनी भल्ला, डॉ. नम्रता पुनित अवस्थी, डॉ. कंचन श्रीवास्तव, डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. नीता कपूर, डॉ. शेफाली अग्रवाल, डॉ. पारुल सक्सेना, डॉ. रिद्धि जैसवाल, डॉ. बबीता सोढ़ी एवं अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों ने की। इस अवसर पर पीजी छात्रों द्वारा विभिन्न रोगों से संबंधित केसों पर पोस्टर प्रस्तुत किए गए, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस वैज्ञानिक गोष्ठी से चिकित्सकों को रोगों के प्रारंभिक,सही व नए निदान (जांच) की जानकारी प्राप्त हुई, जिसका प्रत्यक्ष लाभ आम जनता को बेहतर, समयबद्ध एवं प्रभावी उपचार के रूप में मिलेगा।

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