Bhishma Ashtami 2026: पितृ दोष से मुक्ति पाने का महासंयोग, इस विधि से करें पितरों का तर्पण, सात पीढ़ियां होंगी तृप्त
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/24/article/image/pitru-tarpan-rules-1769230836735_m.webpBhishma Ashtami 2026: पितृ तर्पण नियम। (AI generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Bhishma Ashtami 2026: हिंदू धर्म में माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि 26 जनवरी को पड़ रही है। यह वह दिन है जब महाभारत के महानायक पितामह भीष्म ने अपनी इच्छा से शरीर का त्याग किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ खुश होते हैं। साथ ही कुंडली से पितृ दोष समाप्त होता है।
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भीष्म पितामह का तर्पण इस दिन क्यों होता है? (Why Bhishma Pitamah Tarpan Performed On This Day?)
भीष्म पितामह बाल ब्रह्मचारी थे, इसलिए उनकी कोई अपनी संतान नहीं थी जो उनका श्राद्ध या तर्पण कर सके। उनकी इसी निष्ठा और त्याग से खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि जो व्यक्ति भीष्म अष्टमी के दिन आपके निमित्त तर्पण और जल अर्पण करेगा, उसके पितरों को तृप्ति मिलेगी और उसके जीवन से पितृ दोष के अशुभ प्रभाव कम हो जाएंगे। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन तर्पण करने से सात पीढ़ियों के पितर तृप्त होते हैं और परिवार में सुख और शांति आती है।
पितृ तर्पण की सही विधि ( Tarpan Rules)
[*]भीष्म अष्टमी पर पितरों की शांति के लिए दोपहर के समय यानी कुतप काल में तर्पण करें।
[*]सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें।
[*]दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
[*]एक तांबे या पीतल के पात्र में शुद्ध जल लें।
[*]उसमें गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल, अक्षत और जौ मिलाएं।
[*]दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें या हाथ में कुशा लेकर जल को अंजलि से धीरे-धीरे पात्र में छोड़ें।
[*]तर्पण करते समय पितरों के वैदिक मंत्रों व इस मंत्र \“\“वैयाघ्रपादगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय सर्वभूतहिताय च॥“ का जप करें।
[*]पितरों के तर्पण के साथ-साथ भीष्म पितामह का ध्यान करें और उन्हें जल चढ़ाएं।
करें ये उपाय (Pitru Dosha Remedies)
[*]इस दिन काले तिल और गुड़ का दान करने से राहु-शनि के दोषों और पितृ दोष से राहत मिलती है।
[*]शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाएं या पीपल के वृक्ष के नीचे दीया रखें।
[*]इस दिन तामसिक भोजन और विवादों से दूर रहें। साथ ही मन में श्रद्धा का भाव रखें।
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