लखनऊ सहित 20 जिलों में बढ़ते जा रहे सड़क हादसे, दो साल से सर्वाधिक दुर्घटना वाले जिलों की तैयार की जा रही सूची
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/05_05_2025-vaishali_road_accident_23931660-1769179365606_m.webpधर्मेश अवस्थी, लखनऊ। सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही। हादसे बढ़ने से उनमें होने वाली मौतें और घायलों की संख्या भी बढ़ रही। सड़क पर वाहन चलाने वालों को अपनी जान की परवाह नहीं है और हादसे रोकने के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी बिल्कुल चिंता नहीं है, क्योंकि दोनों में से यदि कोई एक गंभीर हो जाता तो घटनाएं कम हो जाती और सड़कों पर मौतें न होने का सपने सरीखा लक्ष्य हासिल हो सकता था। यह जरूर है कि हादसे रोकने की कागजी खानापूरी सड़क दुर्घटनाओं की तरह बढ़ती जा रही है।
केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने शून्य मृत्यु जिला (जेडएफडी) कार्यक्रम के तहत इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आइआरएडी) के माध्यम से 2023 व 2024 में हुई सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर देश में 100 जिलों एक्सीडेंटल डेथ रिडक्शन डिस्ट्रिक्ट के रूप में चिन्हित किया, इनमें प्रदेश के 20 जिले लखनऊ, कानपुर नगर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, प्रयागराज, बुलंदशहर, उन्नाव, हरदोई, अलीगढ़, मथुरा, बरेली, फतेहपुर, सीतापुर, गोरखपुर, बाराबंकी, कुशीनगर, जौनपुर, बदायूं, फीरोजाबाद व आजमगढ़ जिलों के 283 ऐसे थाने चिन्हित किए गए, जहां 80 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती रही हैं। परिवहन मंत्रालय ने इन जिलों में अभियान चलाकर दुर्घटनाएं खत्म कराने का असंभव सा लक्ष्य दिया है।
केंद्रीय मंत्रालय ने सड़क हादसे रोकने की पहल किया है लेकिन, यूपी के परिवहन विभाग की सड़क सुरक्षा इकाई 2023 से सर्वाधिक दुर्घटना वाले 20 जिलों की सूची बनती रही है और सख्त निर्देश भी जारी होते रहे। 2023 में प्रदेशभर में 44534 सड़क दुर्घटनाओं में 23652 की मौतें हुई थी, 20 जिलों में ही 19676 हादसे व 9683 मौतें हो गई थीं।
ऐसे ही 2024 में 46052 सड़क हादसों में 24118 मौतें हुई थीं, उनमें टाप 20 जिलों में 20700 दुर्घटनाएं व 10092 मौतें हो गई थी। घटनाएं सर्वाधिक दुर्घटना वाले जिलों को चिन्हित करने और सख्त निर्देश भेजने के बाद भी नहीं थमी थी।
2025 में चिन्हित अधिकांश जिलों में दुर्घटना, मौतें व घायलों की संख्या में बढ़ोतरी होने का ही अनुमान है, क्योंकि 2024 में जनवरी से नवंबर तक 41483 घटनाएं हुई थी, जबकि 2025 में इसी अवधि में घटनाएं बढ़कर 46223 हो चुकी थी। हालांकि अभी दुर्घटनाओं की अधिकृत संख्या जारी नहीं हो सकी है। पूर्व अपर परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा पुष्पसेन सत्यार्थी कहते हैं कि सड़क हादसे लोगों की इच्छाशक्ति से ही रुकेंगे।
प्रदेश में इस तरह बढ़ रहे सड़क हादसे
वर्ष - सड़क हादसे - मौतें
2014 - 31034 – 16287
2015 - 32385 – 32385
2016 - 35612 – 19320
2017 - 38811 – 20142
2018 - 42563 – 22256
2019 - 42572 – 22655
2020 - 34243 - 19149
2021 - 37729 – 21227
2022 - 41746 – 22595
2023 - 44534 – 23652
2024 - 46052 - 24118
राजधानी व आसपास का हाल और भी बेहाल
राजधानी की सड़कें दुर्घटनाओं से लाल हैँ, शायद ही कोई ऐसा दिन होता हो, जब हादसे की मनहूस खबर न मिले। लखनऊ में 2023 में 1460, 2024 में 1630 और 2025 में 1800 से अधिक घटनाएं होने का अनुमान है। परिवहन विभाग ने जनवरी से सितंबर तक के जारी आंकड़े में लखनऊ में पिछले वर्ष की अपेक्षा सात प्रतिशत हादसों में बढ़ोतरी माना है। इसी तरह उन्नाव में 19.7, रायबरेली में 58.9, सीतापुर में 9.2, लखीमपुर खीरी में 6.8 और हरदोई में 21.8 हादसे बढ़ गए हैँ। लखनऊ मंडल में यह बढ़ोतरी 16.8 प्रतिशत की है।
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