Shaniwar Remedies: शनिवार के दिन इस विधि से करें हनुमान चालीसा का पाठ, शनि दोष से मिलेगा छुटकारा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/hanuman-chalisa-ka-path-1-1769165001684_m.webpShaniwar Remedies: हनुमान चालीसा का पाठ। (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shaniwar Remedies: हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष होता है, उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। इन सभी कष्टों के छुटकारा पाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ सबसे अचूक और सरल उपाय माना गया है, तो आइए भाव के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं -
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हनुमान चालीसा पाठ विधि (Hanuman Chalisa Path Rules)
[*]सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करें।
[*]हनुमान जी की प्रतिमा के सामने आसन बिछाकर बैठें।
[*]चमेली के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान जी को सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें।
[*]शनिवार के दिन 7 बार या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
[*]पाठ के बाद बूंदी के लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएं।
[*]अंत में पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
।।हनुमान चालीसा का पाठ।। (Hanuman Chalisa Ka Path)
।। दोहा।।
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।।
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ।।
।। चौपाई ।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।।
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।।
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । कांधे मूंज जनेउ साजै ।।
शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन ।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।
भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचन्द्र के काज संवारे ।।
लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।।
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तै कांपै ।।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावै ।।
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।
संकट तै हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।
सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।।
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ।।
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।।
साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।।
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।।
सनातन शास्त्रों में हनुमान पूजा का विशेष उल्लेख देखने को मिलता है।
तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।।
अंतकाल रघुवरपुर जाई । जहां जन्म हरिभक्त कहाई ।।
और देवता चित्त ना धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।।
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मह डेरा ।।
।। दोहा ।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।
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