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UP के सभी जिलों में बजा सायरन और चारों ओर छा गया अंधेरा, ब्लैकआउट और मॉकड्रिल की PHOTOS

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और \“उत्तर प्रदेश दिवस\“ के अवसर पर शुक्रवार शाम सुरक्षा तैयारियों का व्यापक प्रदर्शन किया गया।

बाराबंकी, महराजगंज, फतेहपुर, वाराणसी, मेरठ और पीलीभीत समेत प्रदेश के सभी जिलों में \“ब्लैकआउट मॉकड्रिल\“ का आयोजन किया गया।

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्धकाल या हवाई हमले जैसी आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा, त्वरित बचाव कार्य और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को परखना था।
हवाई हमले का सायरन और ब्लैकआउट

शाम छह बजते ही जैसे ही खतरे का सायरन गूंजा, निर्धारित क्षेत्रों में \“ब्लैकआउट\“ प्रभावी हो गया। बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई और पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया।

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वाराणसी के बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) से लेकर मेरठ के डीएन कॉलेज में सन्नाटा छा गया।

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यही हालत पीलीभीत के ड्रमंड इंटर कॉलेज का भी रहा। अधिकारियों ने बताया कि ब्लैकआउट का उद्देश्य शत्रु विमानों या मिसाइलों के लिए लक्ष्य पहचानना असंभव बनाना होता है।

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आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन का जीवंत प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान बनावटी धमाके किए गए और भवनों में आग लगने के दृश्य सृजित किए गए। बाराबंकी में धमाके के बाद फायर ब्रिगेड और बम डिस्पोजल स्क्वाड ने मोर्चा संभाला।

मेरठ में धमाकों की आवाज सुनते ही एनसीसी कैडेट्स और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक जमीन पर लेट गए, जो हवाई हमले से बचने का मानक प्रोटोकॉल है।

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पीलीभीत और फतेहपुर में मलबे में दबे घायलों को निकालने का रोमांचक प्रदर्शन हुआ। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस ने \“रिस्पॉन्स टाइम\“ का परिचय देते हुए तत्काल घायलों को प्राथमिक उपचार केंद्र और जिला अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान स्ट्रेचरों पर घायलों को ले जाते हुए स्वास्थ्य कर्मियों और आपदा मित्रों की तत्परता देखते ही बन रही थी।

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विभिन्न विभागों का समन्वय

इस वृहद आयोजन में पुलिस प्रशासन, नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस), एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और रेडक्रॉस सोसाइटी ने मिलकर काम किया।

महराजगंज में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, इसलिए शहरों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता अनिवार्य है।

उधर, वाराणसी में डीएम सत्येंद्र कुमार और पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने एनडीआरएफ और पुलिस के संयुक्त तालमेल का निरीक्षण किया।

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पूरे प्रदेश में ठीक 6 बजे बिजली काटी गई। अभ्यास के अंत में \“ऑल क्लियर\“ सायरन बजाया गया, जिसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल हुई। अधिकारियों ने आमजन को संदेश दिया कि ऐसी परिस्थितियों में धैर्य सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को अफवाहों से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सीख दी गई।

फतेहपुर के राजकीय इंटर कॉलेज में बच्चों को सिखाया गया कि हमले के दौरान किस तरह खुद को और दूसरों को सुरक्षित शेल्टर तक ले जाना है।
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