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जज से बहस करने वाले वकील महेश तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से झटका

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जजों को आंख न दिखाएं।



राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जज राजेश कुमार के साथ नोक-झोंक मामले में आपराधिक अवमानना का सामना कर रहे वकील महेश तिवारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान सीजेआइ सूर्यकांत ने महेश तिवारी की आलोचना करते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट से ऐसा आदेश चाहते हैं, जिसे दिखाकर यह कह सकें कि क्या बिगाड़ लिया मेरा? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर वह माफी मांगना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए।

अगर वह जजों को आंख दिखाना चाहते हैं तो वह ऐसा कर सकते हैं। हम यहां बैठे हैं और हम इसे देखेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महेश तिवारी की याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट से कहा कि अगर महेश तिवारी माफी मांग लेते हैं तो उनके प्रति सहानुभूति दिखाई जाए। वकील महेश तिवारी का पिछले साल अक्टूबर में झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार के साथ बहस का एक वीडियो वायरल हुआ था।

महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार से कहा था कि वह हद पार न करें। महेश तिवारी के इस बर्ताव को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ महेश तिवारी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
हाई कोर्ट की पांच जजों की पीठ कर रही सुनवाई

इस मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सहित पांच जजों की पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ आपराधिक अवमानना का आरोप तय करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।

अधिवक्ता महेश तिवारी और जस्टिस राजेश कुमार के बीच तीखी नोक-झोंक का वीडियो वायरल हो गया था। हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ ने निर्णय था कि मामले में पांच जजों की पीठ आपराधिक अवमानना का मामला सुनेगी।

सुनवाई के दौरान पेन ड्राइव के जरिए कोर्ट रूम में पूरे दिन की कोर्ट प्रॉसिडिंग की रिकार्डिंग प्रसारित की गई थी। इस दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी से पूछा गया था कि इस मामले में उन्हें कुछ कहना है या सफाई देनी है।

क्योंकि एकल पीठ में हुए इस कृत्य को प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना माना गया है। कोर्ट आरोप तय करने के लिए बैठी है। अधिवक्ता महेश तिवारी ने कहा था कि हुजूर हमने कोई गलती नहीं की है। मैंने यह बयान बिल्कुल होश में दिया है।

तिवारी ने कहा, हमें इस पर कोई पछतावा नहीं है। इसके बाद अदालत ने आपने आदेश में कहा कि इस कृत्य से न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है। किसी भी जज को अंगुली नहीं दिखाई जा सकती है और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा नहीं पहुंचाई जा सकती है।
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