बेटी दर्द से तड़प रही और पिता सिस्टम से; आयुष्मान कार्ड में उम्र 120 साल कर फंसाया पेंच!
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/ayushman-1769105234796_m.webpप्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बदायूं। शासन की ओर से आयुष्मान कार्ड योजना इसलिए चलाई गई है, जिससे प्रत्येक गरीब को उसका लाभ मिल सके और वह अच्छे अस्पताल में अपना उपचार करा सके, लेकिन यहां स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से एक परिवार को आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिल रहा है। वह अपनी बेटी का आपरेशन तक नहीं करा पा रहा है।
आयुष्मान कार्ड में उसकी उम्र 120 साल कर दी गई है जबकि उसके आधार कार्ड में 54 साल। वह पिछले छह माह से संशोधन कराने को सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहा है और कई बार प्रार्थना पत्र भी दे चुका है लेकिन उसका आयुष्मान कार्ड में संशोधन नहीं कराया गया, जिसकी वजह से उसकी बेटी का आपरेशन भी नहीं हो पाया।
फैजान बेहटा कस्बा निवासी शहंशाह खान की वास्तविक जन्म तिथि 20 मई 1971 है। उनके पास आयुष्मान कार्ड भी है और आधार कार्ड भी, लेकिन आयुष्मान कार्ड में जन्मतिथि 1905 कर दी गई है, जिससे उनके पास आयुष्मान कार्ड होते हुए भी उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अजरा खान की पित्त की थैली में पथरी है और वह उसका आपरेशन कराने का प्रयास कर रहे हैं।
उनके पास इतनी धनराशि नहीं है कि वह उसका ठीक से आपरेशन भी करा सकें। वह कई अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड व आधार कार्ड लेकर गए, लेकिन हर जगह मना कर दिया गया। कह दिया गया कि उनके आयुष्मान कार्ड में 120 साल उम्र है जबकि आधार कार्ड में लगभग 54 साल उम्र है। दोनों कार्डों में एक समान उम्र होनी चाहिए, जिसकी वजह से उनकी बेटी का आपरेशन भी नहीं हो पाया।
वह पिछले छह माह से सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कई बार यहां प्रार्थना पत्र भी दिया है और मांग की है कि उनके आयुष्मान कार्ड में उम्र का संशोधन करा दिया जाए लेकिन स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही इतनी हावी है कि छह माह से उनका आयुष्मान कार्ड संशोधित तक नहीं हो पाया है जबकि उनकी बेटी की पित्त की थैली में पथरी का आकार लगातार बढ़ रहा है। वह दर्द से इतनी परेशान है कि स्वजन उसे लेकर अस्पताल-अस्पताल चक्कर लगा रहे हैं।
21 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाने का दावा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने 21 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाने का दावा किया है और अभी तक कुल जिले में 10 लाख से ज्यादा लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यहां स्वास्थ्य विभाग अपनी गिनती तो पूरी कर रहा है लेकिन इसकी हकीकत क्या है। इस पर नजर नहीं दौड़ाई जा रही। क्या उन सभी लोगों को इसका लाभ मिल रहा है और जिन लोगों को लाभ नहीं मिला, उस पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा और न ही उनकी कोई मदद की जा रही है।
इनका शिकायती पत्र आया था लेकिन यहां से संशोधन नहीं होता। हमने लखनऊ को मेल कर दिया है। कार्ड वहीं से संशोधित होगा।
- डा. वैभव कुमार, नोडल आयुष्मान कार्ड योजना
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