मुनीर की वजह से खोखला हो रहा पाकिस्तान: बेहद खराब हुए अंदरूनी हालात, रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/Asim-Munir-1769106127210_m.webpआसिम मुनीर। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति गंभीर संकट से गुजर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर के नेतृत्व वाली सुरक्षा बलों की परिचालन और सामरिक खामियों के कारण उग्रवादी हमलों और मौतों में वृद्धि हुई है।
तेजी से बिगड़ते अंदरूनी हालात के बीच वह नागरिकों को उग्रवाद और हिंसा से बचाने में विफल रहे हैं। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में स्थिति चिंताजनक हो गई है।
पाकिस्तान में चरमराई सुरक्षा व्यवस्था
एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान में 5,300 से अधिक उग्रवादी हमले दर्ज किए गए। सुरक्षा बलों की परिचालन खामियों के कारण पिछले साल विभिन्न संघर्षों से संबंधित मौतों में 74 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई।
हैरानी की बात यह है कि गत वर्ष ही आसिम मुनीर को \“अनुकरणीय नेतृत्व\“ के लिए फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था, जबकि धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
पाकिस्तान को दी गई चेतावनी
विशेषज्ञों की चेतावनी और आलोचना अफगानिस्तान के पूर्व रक्षा उप मंत्री तमीम असी ने मुनीर की रणनीति को \“\“बड़ी रणनीतिक भूल\“\“ करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुनीर अपने सैनिकों के जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं और पाकिस्तान धीरे-धीरे 1971 (बांग्लादेश के निर्माण) जैसी विनाशकारी स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने मुनीर को बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।
वहीं, वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक पर्ल पंड्या का कहना है कि सैन्य-केंद्रित प्रतिक्रिया ने स्थानीय आबादी (विशेषकर बलूच और पश्तूनों) को देश से अलग-थलग कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बलूचिस्तान में तांबा खनन की मुनीर की योजना उग्रवाद को और अधिक भड़का सकती है।
भविष्य की राह और चुनौतियां रिपोर्ट के अनुसार, उग्रवाद को रोकने के लिए तीन कारक आवश्यक हैं - उग्रवादियों पर निरंतर सैन्य दबाव; बलूच और पश्तून समूहों के साथ राजनीतिक जुड़ाव; और अफगानिस्तान का सहयोग।
फिलहाल पाकिस्तानी सेना केवल सैन्य दबाव पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि राजनीतिक संवाद की कमी और अफगानिस्तान के साथ खराब संबंधों के कारण 2026 में भी हिंसा और अस्थिरता जारी रहने की आशंका जताई गई है।
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