बिहार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर कोर्ट का बड़ा फैसला, नियुक्ति बगैर अभ्यर्थी अनुभव प्रमाण पत्र का हकदार नहीं
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/Patna-High-Court-1769073176033.webpजागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बिहार के विश्वविद्यालयों में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की अनुशंसा के आधार पर हुई सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में अनियमिततता और गड़बड़ी की शिकायत की सुनवाई में पटना उच्च न्यायालय ने शैक्षणिक अनुभव को लेकर आदेश जारी किया है।
कोर्ट ने कहा है कि अगर अभ्यर्थी की औपचारिक नियुक्ति नहीं हुई तो वह अनुभव प्रमाणपत्र का हकदार नहीं है। केवल वर्ग में कुछ कक्षाओं में अध्यापन करने के आधार पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकते हैं।
पिछले दिनों हुई कई विषयों की नियुक्ति में अधिकांश संदेहास्पद मामले अनुभव प्रमाण पत्र से जुड़े हैं। कॉलेजों ने मानकों का पालन किए बगैर ही अनुभव प्रमाण पत्र जारी किए हैं। पिछले दिनों कई विश्वविद्यालयों में नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के शैक्षणिक दस्तावेज के साथ-साथ अनुभव प्रमाण पत्र को लेकर आयोग से लेकर शिक्षा विभाग में कई शिकायतें पहुंची हैं।
इसमें कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति तिथि से ही सेवा संपुष्टि होने, नियुक्ति तिथि के पांच दिन बाद सेवा संपुष्ट होने और कॉलेज को संबंधन से पहले भी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े कई मामले की शिकायत की गई है।
राजनीति विज्ञान के छह अभ्यर्थियों ने प्रस्तुत किए साक्ष्य:
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में दस्तावेज में कमी और अन्य संदेह के आधार राजनीति विज्ञान में पदस्थापन से रोके गए छह अभ्यर्थियों के दस्तावेज की जांच बुधवार को हुई। कमेटी के सदस्यों ने विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए चेकलिस्ट के आधार पर अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज के लिए उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की जांच की।
कमेटी के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि अभ्यर्थियों ने साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए हैं। अब विश्वविद्यालय की ओर से इस पर निर्णय लिया जाएगा।
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