पंजाब में किसान स्मार्ट मीटर उतार जमा करवाने पहुंचे; 5 फरवरी को मंत्रियों-विधायकों के घरों को घेरने की तैयारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/4A-1769069545063.webpस्मार्ट मीटर उतार बिजली घरों में जमा करवाने पहुंचे किसान।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। किसान मजदूर मोर्चा भारत, चैप्टर पंजाब की ओर से निजीकरण की नीतियों के खिलाफ पंजाब भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों में लगाए गए स्मार्ट मीटर उतारकर नजदीकी बिजली घरों में जमा कराएं।
किसान संगठनों के आह्वान पर अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, मोगा, लुधियाना, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला और मोहाली सहित कई जिलों में किसान मीटर बिजली घरों में लेकर पहुंचे। मोर्चे का आरोप है कि विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के निर्देशों पर केंद्र सरकार कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां लागू कर रही है।
इन नीतियों के तहत बिजली, बीज बाजार, कृषि शोध, पानी, शिक्षा और खेती जैसे विषयों पर ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जो राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और देश के संघीय ढांचे व संविधान की भावना के खिलाफ हैं।
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केंद्र राज्य के अधिकारों में दे रही दखल
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जहां एक तरफ जनविरोधी और “काले कानून” ला रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के अधिकारों में दखल देकर संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। मोर्चे का आरोप है कि पंजाब सरकार, केंद्र की नीतियों का विरोध करने के बजाय, उनके साथ मिलकर कॉरपोरेट समर्थक फैसले लागू कर रही है।
इसके साथ ही पंजाब में उठ रहे जन आंदोलनों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बदनाम कर दबाने की कोशिश की जा रही है। किसान मजदूर मोर्चा ने कहा कि यह लड़ाई केवल किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों या विद्यार्थियों की नहीं है, बल्कि शहरी व्यापारियों और छोटे दुकानदारों की भी है।
ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल की नीतियों के जरिए धीरे-धीरे छोटे कारोबारियों, दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों को खत्म किया जा रहा है।
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5 फरवरी को विधायकों-मंत्रियों के घरों का होगा घेराव
आज के कार्यक्रमों के दौरान पारित प्रस्तावों में कहा गया कि पंजाब में राज्य प्रायोजित नशा अपने चरम पर है, जिसे रोकने में केंद्र और पंजाब सरकार पूरी तरह असफल रही हैं। बेरोजगार युवाओं को अपराध की दुनिया की ओर धकेला जा रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और हर पंजाबी चिंतित है।
मोर्चे ने 24 जनवरी को बठिंडा में प्रेस की आवाज को दबाने के खिलाफ होने वाले आंदोलन को समर्थन देने का भी ऐलान किया। इसके अलावा 5 फरवरी को पंजाब के विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करने का कार्यक्रम घोषित किया गया है और आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है।
इन कार्यक्रमों में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब, बीकेयू क्रांतिकारी, बीकेयू दोआबा, बीकेयू आजाद, बीकेयू बहिरामके, किसान मजदूर हितकारी सभा, बीकेयू भनेड़ी और बीकेएमयू सहित कई संगठनों ने किसान मजदूर मोर्चा भारत, चैप्टर पंजाब का समर्थन किया।
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