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कटी बाजू यमुना नदी में फेंककर, बच्चे को रोड पर छोड़ा; अब 700 गांव और 4000 किमी खाक छानकर इंस्पेक्टर ने खोल दी पूरी पोल

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नाबालिग की कटी बाजू फेंकी थी नदी में, पुलिस-स्वास्थ्य विभाग कटघरे में। फाइल फोटो



दीपक बहल, अंबाला। सरकारी तंत्र की बेरुखी और संवेदनहीनता की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जहां एक नाबालिग बच्चा अपनी कटी हुई बाजू के साथ नहीं, बल्कि बिना इलाज, बिना पहचान और बिना सहारे जिंदगी और मौत के बीच भटकता रहा। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) सीआईए अंबाला के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश की विस्तृत जांच ने न केवल इस दर्दनाक घटना की परतें खोलीं, बल्कि पलवल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही को भी उजागर कर दिया।

अब रेलवे एसपी नीतिका गहलोत इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग हरियाणा को सौंपेंगी। इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश ने ब्लाइंड केस को सुलझाने के लिए जहां 700 गांव और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार तक करीब 4000 किलोमीटर का सफर तय किया। जब जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि ट्रेन में भीड़ होने के कारण बच्चा स्वजनों से बिछड़ गया और फिर नोएडा का अनिल इसे अपनी डेरी पर ले गया।

चारा मशीन पर काम करवाते समय बच्चे की बाजू कट गई और इलाज की जगह चारा और बच्चे की बाजू को उसने यमुना नदी में बहा दिया। बच्चे को बड़ोली और पलवल रोड के बीच अकेले छोड़ दिया। पुलिस ने बच्चे को अस्पताल तक तो पहुंचाया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कार्रवाई करने की जगह पल्ला झाड़ लिया। स्वास्थ्य विभाग ने भी पुलिस को रुक्का ही नहीं भेजा, जिसके चलते यह कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।
किशनगढ़ के लिए ट्रेन में अपने पिता के साथ सवार हुआ था बच्चा

मई 2025 में जींद से किशनगढ़ बिहार जाने वाले फरक्का एक्सप्रेस में बच्चा अपने पिता भीमलाल ऋषिदेव के साथ रवाना हुआ था। जनरल डिब्बे में भीड़ अधिक होने के कारण बिछड़ गया। ट्रेन जब पुरानी दिल्ली स्टेशन पर पहुंची, तो पिता ने उतरकर देखा लेकिन बच्चे का पता नहीं चल पाया।

पिता को लगा कि बच्चा ट्रेन के डिब्बे में होगा। ट्रेन जब बिहार पहुंच गई तो बच्चा वहां भी नहीं मिला। जुलाई 2025 में ही बच्चे के मिलने की सूचना पर पिता हरियाणा आए और बेटे को पीजीआई रोहतक में दाखिल कराया। इस दर्दनाक दास्तां की जब जानकारी आयोग तक पहुंची तो उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब कर ली।
नाबालिग को मोटरसाइकिल पर बिठाकर इंस्पेक्टर ने तलाशा घटनास्थल

इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश बहादुरगढ़ में जीआरपी थाने में तैनात थे जिन्होंने एसपी रेलवे नीतिका गहलोत के आदेश पर जांच शुरू की। रोहतक में जाकर जब इंस्पेक्टर ने बच्चे के पिता से पूछताछ की तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बच्चे का तीन बार आपरेशन हो चुका था। जीआरपी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

जीआरपी ने अपने स्तर पर टोल की फुटेज चेक की लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। इंस्पेक्टर बिहार पहुंचे और बच्चे को लेकर सभी जगहों पर घुमाया ताकि घटनास्थल का पता चल पाए। बच्चा सिर्फ मालिक का नाम अनिल बता रहा था और जंगल में डेरी और संचालक की दो बेटियों के नाम बताए। बच्चे को लेकर गांव-गांव घूमे। बच्चे को जब यमुना नदी के साथ-साथ लेकर चली, तो बच्चे ने बताया कि इसी तरह की रेत वहां थीं। इसके बाद पुलिस ग्रेटर नोएडा की इस डेरी तक पहुंच गई। निशानदेही भी हो गई जिस चारा मशीन से बाजू कटी थी वह वहां थी।
इस तरह नंगे बदन मास्टर को मिला था बच्चा

दरअसल, बाजू कट जाने के बाद अनिल उसे डेरी से दूर पलवल रोड पर छोड़कर चला गया। पुलिस को लोगों ने सूचना दी, जिसके बाद उसे अस्पताल में दाखिल करा दिया गया। पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा और अस्पताल ने भी बच्चे को इलाज के लिए नूंह रेफर तो कर दिया लेकिन पुलिस को रुक्का नहीं भेजा।

बच्चा इलाज के दौरान रात को अस्पताल से भाग गया, लेकिन सुबह लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया। पुलिस ने बच्चे से उसके पिता और गांव का नाम पूछा जिसके बाद उसके स्वजन सूचना पाकर अस्पताल आ गए और पीजीआई रोहतक में दाखिल करवा दिया।
आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान

मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया और एसपी रेलवे हरियाणा से इस केस की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। केस में आगामी सुनवाई 17 मार्च 2026 को होनी है। आयोग ने हरियाणा सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक हरियाणा को नियमों के अनुसार इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को उपयुक्त प्रशंसा/पुरस्कार हेतु विचारार्थ लेने की अनुशंसा की है।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा व सदस्यों कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने इस मामले में टिप्पणी की है। इनका कहना है कि यह सतत अपराध की श्रेणी में आता है, जो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैला है।
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