उत्तर प्रदेश में एक हजार से ज्यादा भूमिहीन किसानों को आवंटित हुई उपजाऊ जमीन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ताकत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/yogi-(9)-1769012390774.webpयोगी सरकार ने भूमिहीन किसानों को दी उपजाऊ जमीन
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के \“समावेशी विकास\“ के विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के राजस्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित भूमि सुधार लक्ष्यों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा समय से पहले ही पूरा कर लिया है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों और भूमिहीन किसानों को न केवल कृषि भूमि आवंटित की जा रही है, बल्कि उन्हें सिर छिपाने के लिए आवास स्थल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का यह कदम प्रदेश में सामाजिक न्याय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया दस्तावेज बन रहा है।
1076 किसानों को मिली कृषि भूमि की सौगात
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे भू-सुधार कार्यक्रम के तहत राजस्व विभाग ने अब तक 1076 आवंटियों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित की है। यह आंकड़ा चालू वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य का 69.16 प्रतिशत है। इस पहल से भूमिहीन और सीमांत किसानों को अपनी आजीविका चलाने के लिए उपजाऊ भूमि प्राप्त हुई है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि राज्य के कुल कृषि उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की जाएगी।
आवास स्थल आवंटन में रिकॉर्ड प्रगति
ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की समस्या को दूर करने के लिए राजस्व विभाग तेजी से काम कर रहा है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित कर दिए हैं, जो तय लक्ष्य का 70.90 प्रतिशत है। आवास मिलने से इन परिवारों के सामाजिक स्तर में सुधार आया है और उन्हें एक सुरक्षित भविष्य का भरोसा मिला है।
सामाजिक न्याय और समावेशी नीति
प्रदेश सरकार के इस भूमि सुधार कार्यक्रम में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। राजस्व विभाग की यह नीति भूमि का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार का मानना है कि भूमि और आवास का मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक असमानता कम होगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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