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समावेशी और समान शिक्षा से ही विकसित भारत का मार्ग होगा प्रशस्त: धर्मेंद्र प्रधान

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। (फाइल)



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक में पिछले सालों में नामांकन प्रतिशत तो बढ़ा है लेकिन इसके बाद भी देश में बड़ी संख्या में ऐसे दिव्यांग बच्चे है, जिन्हें समान शिक्षा का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इन बच्चों को पढ़ाने और उन्हें दूसरे बच्चों की तरह शिक्षा का सामान अवसर मुहैया कराने की दिशा में शिक्षा मंत्रालय ने पहल तेज की है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए समाज का भी सहयोग मांगा और कहा कि समावेशी शिक्षा केवल स्कूलों या परिवारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। समान अवसर, गरिमा व भागीदारी पर आधारित यह सामूहिक ²ष्टिकोण ही विकसित भारत को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

प्रत्येक बच्चों को समावेशी शिक्षा मुहैया कराने की रणनीति बनाने को लेकर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें ऐसे बच्चों को स्कूल स्तर से ही पहचानना होगा। साथ इन्हें पढ़ाने के लिए सभी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की भी तैनाती देनी होगी।

उन्होंने कहा कि ऐसे 1.20 करोड़ ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में विशेष शिक्षक कहां से आएंगे यह भी एक चुनौती है। ऐसे में जब तक स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की तैनाती नहीं हो जाती है, तब तक ऐसे बच्चों को उन्होंने एआइ या टेक्नालाजी की मदद से बढ़ाने की पैरवी की।

इस मौके पर सम्मेलन को स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने भी संबोधित किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में सभी राज्यों के साथ शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, स्टार्टअप आदि को आमंत्रित किया गया है।
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